राष्ट्रीय
07-Jan-2026
...


मनरेगा खत्म करने की साजिश का लगाया आरोप लखनऊ (ईएमएस)। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ‘जी राम जी योजना’ को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह योजना दरअसल मनरेगा को धीरे-धीरे समाप्त करने की एक सोची-समझी और गोपनीय साजिश है। बुधवार को अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सिर्फ नाम बदल देने से सच्चाई नहीं बदल जाती। उनके मुताबिक, भाजपा सरकार मनरेगा का नाम बदलने की आड़ में इस गरीबों से जुड़ी योजना को खत्म करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। अखिलेश यादव ने कहा कि एक ओर केंद्र सरकार लगातार मनरेगा का बजट घटाती जा रही है, वहीं दूसरी ओर राज्यों पर अतिरिक्त खर्च का दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि जीएसटी व्यवस्था के तहत राज्यों को समय पर उनका पैसा नहीं मिल पा रहा है, जिससे पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रहे राज्यों के लिए नई योजनाओं का बोझ उठाना मुश्किल हो गया है। ऐसे में राज्य सरकारें मजबूरी में मनरेगा जैसी योजनाओं से दूरी बना लेंगी और यह योजना अपने आप खत्म होती चली जाएगी। सपा प्रमुख ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने सैकड़ों ग्राम सभाओं को ‘अर्बन कैटेगरी’ में डालकर उनका मनरेगा बजट भी समाप्त कर दिया है। उन्होंने कहा कि असल मंशा मनरेगा को मजबूत करने की नहीं, बल्कि उसे ‘राम-राम’ कहने की है। अखिलेश यादव ने कटाक्ष करते हुए कहा कि भाजपा अपने अलावा किसी और का पेट भरते हुए नहीं देख सकती और गरीबों के हित उसके एजेंडे में नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि गरीब आज भी वही है, लेकिन भाजपा को गरीबों की जरूरतों से कोई सरोकार नहीं है। गौरतलब है कि इससे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘विकसित भारत जी राम जी-गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन’ को लेकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा था। मुख्यमंत्री ने इस योजना की सराहना करते हुए कहा था कि इसके तहत अब बेकार और अस्थायी कामों की जगह स्थायी और उपयोगी कार्य कराए जाएंगे। उन्होंने बताया कि रेन वाटर हार्वेस्टिंग, चेक डैम, सड़क, नाली, खेल मैदान, ओपन जिम, मंडी और बड़ी पंचायतों में माल निर्माण जैसे कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। मुख्यमंत्री योगी ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह अधिनियम विकसित भारत की नींव साबित होगा और प्रदेश की लगभग 58 हजार ग्राम पंचायतों तथा एक लाख से अधिक राजस्व ग्रामों को इसका लाभ मिलेगा। वहीं, विपक्ष इसे गरीबों के रोजगार के अधिकार पर हमला बताते हुए लगातार सवाल खड़े कर रहा है। डेविड/ईएमएस 07 जनवरी 2026