राष्ट्रीय
08-Jan-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। बदलती जीवनशैली, बढ़ता तनाव और असंतुलित खानपान के बीच सेहत को प्राथमिकता देना समय की जरूरत बन चुका है। आयुर्वेदिक सिद्धांतों पर आधारित कुछ आसान नियमों को अपनाकर न केवल बीमारियों से बचा जा सकता है, बल्कि पूरे साल ऊर्जा और सकारात्मकता भी बनाए रखी जा सकती है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसार, स्वस्थ जीवन की शुरुआत संतुलित आहार से होती है। रोजमर्रा के भोजन में ताजे फल, हरी सब्जियां और प्रोटीन से भरपूर चीजों को शामिल करना बेहद जरूरी है। मोटे अनाज जैसे ज्वार, बाजरा और रागी को थाली में जगह देने से शरीर को जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है और वजन भी नियंत्रण में रहता है। संतुलित आहार शरीर को भीतर से मजबूत बनाता है और संक्रमणों से लड़ने की ताकत देता है। इसके साथ ही नियमित व्यायाम को दिनचर्या का हिस्सा बनाना भी उतना ही जरूरी है। रोजाना कम से कम 30 मिनट योगासन, टहलना या हल्की वॉक करने से शरीर सक्रिय रहता है। सूर्य नमस्कार, कपालभाति, भ्रामरी और अनुलोम-विलोम जैसे प्राणायाम न केवल शारीरिक मजबूती बढ़ाते हैं, बल्कि मानसिक शांति भी प्रदान करते हैं। इससे हृदय, फेफड़े और मांसपेशियां स्वस्थ रहती हैं। स्वस्थ रहने के लिए शरीर को हाइड्रेट रखना भी बेहद जरूरी है। दिनभर में 8 से 10 गिलास पानी पीने से पाचन तंत्र बेहतर रहता है और शरीर से विषैले तत्व बाहर निकलते हैं। इसके अलावा, नींद को नजरअंदाज करना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। हर रात 7 से 8 घंटे की गहरी नींद लेने से शरीर खुद को रिपेयर करता है, थकान दूर होती है और दिमाग तरोताजा रहता है। मानसिक स्वास्थ्य के लिए तनाव से दूर रहना भी जरूरी है। रोजाना कुछ समय ध्यान या मेडिटेशन करने से मन शांत रहता है और एकाग्रता बढ़ती है। साथ ही व्यक्तिगत स्वच्छता पर ध्यान देना भी स्वास्थ्य का अहम हिस्सा है। हाथ धोने और साफ-सफाई जैसे छोटे-छोटे नियम कई बीमारियों से बचाते हैं। तंबाकू, शराब और अन्य नशीले पदार्थों से दूरी बनाना जरूरी है, क्योंकि ये शरीर को धीरे-धीरे खोखला कर देते हैं। बाहर के जंक फूड और डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों से परहेज कर ताजा और घर का बना भोजन अपनाना बेहतर विकल्प है। सुदामा/ईएमएस 08 जनवरी 2026