08-Jan-2026
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- 50 देशों के 1,071 पतंगबाज लेंगे भाग, पांच लाख से अधिक पर्यटकों के आने की उम्मीद अहमदाबाद (ईएमएस)| गुजरात में उत्तरायण अर्थात मकर संक्रांति का पर्व विशेष महत्व रखता है। इस अवसर पर पूरे राज्य में पतंग प्रेमी रंग-बिरंगी पतंगों से आसमान को सजाते हैं। इसी परंपरा को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करते हुए इस वर्ष ‘अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव-2026’ का भव्य आयोजन किया जा रहा है। महोत्सव का उद्घाटन 12 जनवरी 2026 को सुबह अहमदाबाद के साबरमती रिवरफ्रंट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करकमलों से होगा। उद्घाटन समारोह में जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ की प्रेरक उपस्थिति भी रहेगी। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के दिशा-निर्देश और उप मुख्यमंत्री हर्ष संघवी के मार्गदर्शन में इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। 12 से 14 जनवरी 2026 तक अहमदाबाद में आयोजित होने वाले इस महोत्सव में अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय पतंगबाज विशाल और अनोखी पतंगों की उड़ान भरेंगे। 13 जनवरी को विशेष रात्रि पतंग उड़ान भी आकर्षण का केंद्र रहेगी। महोत्सव के दौरान अहमदाबाद की विरासत को दर्शाती हेरिटेज हवेलियां, प्राचीन पोल, रंगीन हस्तकला बाजार, हेरिटेज वॉक-वे पर पतंग संग्रहालय, और आकर्षक आइकॉनिक फोटो वॉल इंस्टॉलेशन दर्शकों को लुभाएंगे। प्रतिदिन शाम 7:00 बजे से विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे, जिनमें प्रसिद्ध लोक गायिका किंजल बेन दवे प्रस्तुति देंगी। इस वर्ष महोत्सव में 50 देशों के 135 अंतरराष्ट्रीय पतंगबाज, भारत के 13 राज्यों से 65, तथा गुजरात के 16 जिलों से 871 पतंगबाज भाग लेंगे। इस प्रकार कुल 1,071 पतंग प्रेमी इस आयोजन का हिस्सा बनेंगे। साथ ही 25 हस्तकला स्टॉल और 15 फूड स्टॉल स्थानीय कला, हस्तशिल्प और पारंपरिक व्यंजनों को बढ़ावा देंगे। अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव-2026 केवल अहमदाबाद तक सीमित नहीं रहेगा। यह 10 जनवरी को राजकोट, सूरत और कच्छ के धोलावीरा, 11 जनवरी को वडनगर, शिवराजपुर और स्टैच्यू ऑफ यूनिटी, तथा 13 जनवरी को वडोदरा में भी आयोजित किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2025 में इस महोत्सव ने पूरे गुजरात में 3.83 लाख से अधिक पर्यटकों को आकर्षित किया था। गुजरात टूरिज्म के अनुसार, इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव-2026 के दौरान अनुमानित पांच लाख से अधिक पर्यटक गुजरात की यात्रा करेंगे, जिससे राज्य को अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान मिलेगी। सतीश/08 जनवरी