10-Jan-2026
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बेंगलुरु (ईएमएस)। बेंगलुरु एयरपोर्ट ने अपने परिसर में इन-हाउस इंटीग्रेटेड सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट सेंटर की शुरुआत की है, जिसे आईएसडब्ल्यूएमसी नाम दिया गया है। इसका मकसद एयरपोर्ट पर निकलने वाले कचरे का वहीं वैज्ञानिक तरीके से निपटान करना है। एयरपोर्ट अधिकारियों के अनुसार, केंपेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से रोजाना करीब 24 से 26 टन कचरा निकलता है। इसमें यात्रियों की जूठन, फूड कोर्ट और किचन से निकलने वाला गीला कचरा, दुकानों और अन्य सुविधाओं से निकलने वाला सूखा कचरा शामिल है। इस गीले यानी ऑर्गेनिक कचरे को बायो-मीथनेशन टेक्नोलॉजी के जरिए प्रोसेस किया जाता है, जिससे कंप्रेस्ड बायोगैस तैयार होती है। इसी बायोगैस का इस्तेमाल एयरपोर्ट के किचन में खाना बनाने के लिए किया जा रहा है। यानी यात्रियों की जूठन पहले गैस में बदलती है और फिर उसी गैस से अगला खाना पकता है। यह पहल सिर्फ गैस बनाने तक सीमित नहीं है। जूठन और ऑर्गेनिक कचरे से जैविक खाद और लिक्विड मैन्योर भी तैयार किया जा रहा है। इस खाद और मैन्योर का उपयोग एयरपोर्ट परिसर की गार्डनिंग और लैंडस्केपिंग में किया जाता है, जिससे हरियाली बनी रहती है और केमिकल खाद पर निर्भरता कम होती है। वहीं, सूखे कचरे को आधुनिक सेग्रिगेशन सिस्टम से अलग किया जाता है। जो कचरा रिसाइकल हो सकता है, उसे अधिकृत रिसाइकलिंग पार्टनर्स को भेजा जाता है, जबकि जो रिसाइकल नहीं हो सकता, उसका इस्तेमाल सीमेंट इंडस्ट्री में को-प्रोसेसिंग के लिए किया जाता है। आईएसडब्ल्यूएमसी की कुल प्रोसेसिंग क्षमता 77 टन प्रतिदिन की है, जिसमें गीला और सूखा दोनों तरह का कचरा शामिल है। इस नई व्यवस्था से 97 से 98 प्रतिशत कचरा लैंडफिल में जाने से बचाया जा रहा है और केवल 2 से 3 प्रतिशत कचरा ही बाहर भेजने की जरूरत पड़ती है। यह न सिर्फ पर्यावरण के लिए फायदेमंद है, बल्कि कार्बन उत्सर्जन को कम करने में भी मदद करता है। गौरतलब है कि बेंगलुरु का केंपेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहले ही एशिया का पहला ऐसा एयरपोर्ट बन चुका है, जिसे लेवल-5 कार्बन एक्रिडिटेशन मिला है। कचरा प्रबंधन की यह नई पहल उसकी सस्टेनेबिलिटी यात्रा को और मजबूत बनाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर देश के अन्य बड़े एयरपोर्ट और सार्वजनिक स्थान भी इस मॉडल को अपनाएं, तो कचरे की समस्या और ऊर्जा संकट दोनों से काफी हद तक निपटा जा सकता है। सुदामा/ईएमएस 10 जनवरी 2026