नैपीडॉ (ईएमएस)। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की बार-बार की चेतावनियों के बावजूद चीन में नागरिक समाज के लिए लोकतांत्रिक जगह तेजी से खत्म होती जा रही है। हालिया वैश्विक रिपोर्टों के अनुसार, चीनी अधिकारियों की बढ़ती सख्ती यह स्पष्ट करती है कि शासन किसी भी तरह की स्वायत्तता या विरोध के स्वर के प्रति अत्यंत असहिष्णु हो चुका है। वर्तमान में चीन का सामाजिक वातावरण भय, खामोशी और जबरन अनुरूपता के दौर से गुजर रहा है, जहां न्याय की संभावनाएं लगभग समाप्त नजर आती हैं। विभिन्न मानवाधिकार समूहों द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, चीन में नागरिक स्वतंत्रता अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। दमन का यह नया अभियान किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों को अपनी चपेट में ले रहा है। श्रमिक कार्यकर्ता, छात्र, वकील, धार्मिक अनुयायी और यहां तक कि सोशल मीडिया पर टिप्पणी करने वाले आम नागरिक भी अब चौबीसों घंटे चलने वाली निगरानी और मनमानी हिरासत के जाल में फंस रहे हैं। रिपोर्टों में इसे अलग-थलग घटनाओं के बजाय दमन का एक व्यवस्थित पैटर्न बताया गया है, जिसे धीरे-धीरे सामान्य घोषित किया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि असहमति को दबाने के लिए चीन की न्यायिक प्रणाली में अक्सर झगड़ा भड़काने और उपद्रव करने जैसी अस्पष्ट और व्यापक आपराधिक धाराओं का सहारा लिया जा रहा है। इसका एक प्रमुख उदाहरण हेनान प्रांत के श्रमिक अधिकार कार्यकर्ता शिंग वांगली का मामला है। उन्हें तीन साल की जेल की सजा सुनाई गई और सुनवाई के दौरान उन्हें अपने वकीलों या परिजनों से संपर्क तक करने की अनुमति नहीं दी गई। उल्लेखनीय है कि वांगली अपने जीवन का एक दशक से अधिक समय जेल में बिता चुके हैं, जो यह दर्शाता है कि वहां सक्रिय कार्यकर्ताओं को बार-बार निशाना बनाने की नीति अपनाई जा रही है। वैश्विक स्तर पर इस स्थिति को लेकर गहरी चिंता जताई जा रही है। आलोचकों का मानना है कि पारदर्शी कानूनी प्रक्रिया के अभाव और अस्पष्ट कानूनों के कारण चीन में अब न्यायिक स्वतंत्रता केवल कागजों तक सीमित रह गई है। निगरानी तंत्र इतना मजबूत कर दिया गया है कि लोग सार्वजनिक और डिजिटल दोनों ही स्थानों पर अपनी राय व्यक्त करने से कतरा रहे हैं। यह स्थिति न केवल चीन के भीतर मानवाधिकारों के गिरते स्तर को दर्शाती है, बल्कि वैश्विक लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए भी एक बड़ी चुनौती पेश कर रही है। वीरेंद्र/ईएमएस 11 जनवरी 2026