क्षेत्रीय
16-Jan-2026
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-आदिवासी महिला के साथ संदिग्ध हालत में पकड़ा गया ASI - गांव में दहशत, पुलिस खामोश बालाघाट (ईएमएस)। आदिवासी इलाकों में सुरक्षा और भरोसे की प्रतीक मानी जाने वाली वर्दी पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बालाघाट जिले के अति संवेदनशील गांव पितकोना में हॉकफोर्स कैंप में तैनात एक एएसआई पर आदिवासी महिला के साथ आपत्तिजनक स्थिति में पकड़े जाने का आरोप सामने आया है। चौंकाने वाली बात यह है कि यह पूरा मामला महिला के पति द्वारा रंगे हाथ पकड़े जाने से जुड़ा बताया जा रहा है, लेकिन पुलिस से जुड़ा मामला होने के कारण अब तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं हो सकी है। दरअसल, घटना 12 जनवरी की रात करीब 12 बजे की बताई जा रही है। उस समय गांव में नाचा कार्यक्रम चल रहा था और लगभग पूरा गांव उत्सव में शामिल था। इसी बीच अंधेरे का फायदा उठाकर हॉकफोर्स कैंप में पदस्थ ए.एस.आई अखिलेश तोमर कथित तौर पर महिला के घर में आपत्तिजनक स्थिति में पकडे गये। महिला के पति का आरोप है कि उसने अपनी पत्नी और एएसआई को संदिग्ध स्थिति में देखा, जिसके बाद दोनों के साथ मारपीट भी हुई। घटना की जानकारी गांव और समाज के लोगों को दी गई, लेकिन पुलिस की वर्दी का डर इतना हावी है कि कोई खुलकर सामने आने को तैयार नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, मामला विभाग तक भी पहुंच चुका है, लेकिन अब तक न कोई जांच, न पूछताछ और न ही कोई कार्रवाई सामने आई है। समाज के प्रभावशाली लोगों को सूचना देने के बाद बैठक में फैसला करने की बात कहकर मामला टाल दिया गया। गांव के पूर्व सरपंच चंदनसिंह उईके और वर्तमान सरपंच फूलसिंह मरावी ने भी स्वीकार किया कि इस घटना को लेकर गांव में चचार्एं जोरों पर हैं, लेकिन कोई औपचारिक शिकायत नहीं हो पाई है। पुराना जख्म, वही पैटर्न?--- स्थानीय लोगों ने यह भी याद दिलाया कि मोतिनाला थाना क्षेत्र में पूर्व में हॉकफोर्स के एक इंस्पेक्टर पर युवती से अवैध संबंध, गर्भपात और भारी रकम देकर मामला दबाने जैसे गंभीर आरोप लगे थे। उस मामले में भी न जांच हुई, न सच्चाई सामने आई। क्या आदिवासी क्षेत्र में तैनात सुरक्षा बल स्थानीय महिलाओं की असुरक्षा का कारण बनते जा रहे हैं? क्या आदिवासी इलाकों में वर्दी का भय, न्याय पर भारी पड़ रहा है? क्या इस मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच होगी या यह मामला भी दबा दिया जायेगा। आज पितकोना गांव में खामोशी है, डर है और गुस्सा है, लेकिन आवाज नहीं। अगर इन आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाए, तो न सिर्फ सच्चाई सामने आएगी, बल्कि वर्दी की गरिमा भी बचाई जा सकती है। फिलहाल सवाल यही है—क्या कानून सबके लिए बराबर है, या वर्दी पहनने से जवाबदेही खत्म हो जाती है? इस संबंध में एसडीओपी लॉजी से चर्चा की गई तो उन्होंने कहा कि मुझे आप से जानकारी मिल रही हैं, हम जानकारी लेकर करवाही करवाएंगे।