अंतर्राष्ट्रीय
16-Jan-2026
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-सुप्रीम लीडर अखुंदजादा और गृहमंत्री हक्कानी के गुट में मनमुटाव काबुल,(ईएमएस)। अफगानिस्तान में तालिबान सरकार के भीतर गंभीर संकट के संकेत मिल रहे हैं। सत्ता के शीर्ष पर बैठे नेताओं के बीच बढ़ती खींचतान अब खुलकर सामने आने लगी है और हालात ऐसे बन गए हैं कि सरकार के ढहने का खतरा मंडराने लगा है। इसका दावा मीडिया रिपोर्ट में किया गया है, जिसके अनुसार तालिबान के सुप्रीम लीडर हिबतुल्लाह अखुंदजादा और गृह मंत्री सिराजुद्दीन हक्कानी के गुटों के बीच मतभेद गहरा गए हैं। हाल ही में सामने आई एक वायरल ऑडियो क्लिप ने संगठन की अंदरूनी कलह को उजागर कर दिया है। जिस ऑडियो का हवाला मीडिया रिपोर्ट में दिया गया वह ऑडियो जनवरी 2025 का बताया जा रहा है, जिसमें अखुंदजादा दक्षिणी शहर कंधार के एक मदरसे में तालिबान लड़ाकों को संबोधित कर रहे हैं। अपने भाषण में उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि सरकार के भीतर ही लोग एक-दूसरे से टकरा रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह स्थिति बनी रही तो इस्लामिक अमीरात यानी तालिबान सरकार खत्म हो सकती है। यह बयान उन अफवाहों को बल देता है, जो बीते कई महीनों से तालिबान की शीर्ष नेतृत्व में फूट को लेकर चल रही थीं। तालिबान अब तक आधिकारिक तौर पर ऐसे किसी भी मतभेद से इनकार करता रहा है। यहां तक कि अंतर्राष्ट्रीय मीडिया के सवालों पर भी संगठन ने एकता का दावा किया। वहीं दूसरी तरफ मीडिया रिपोर्ट में मामले की जांच करने और जांच में शामिल नेताओं और अधिकारियों के नाम गोपनीय रखने की बात कहती है। इस रिपोर्ट की मानें तो जांच में पहली बार स्पष्ट रूप से सामने आया कि तालिबान के भीतर दो शक्तिशाली गुट सक्रिय हैं। पहला गुट सुप्रीम लीडर अखुंदजादा के प्रति पूरी तरह वफादार है और कंधार से संचालित होता है। यह गुट अफगानिस्तान को दुनिया से अलग-थलग रखते हुए एक सख्त इस्लामिक अमीरात के रूप में चलाना चाहता है। दूसरा गुट राजधानी काबुल में प्रभावी है और इसका नेतृत्व गृह मंत्री सिराजुद्दीन हक्कानी कर रहे हैं। हक्कानी गुट भी इस्लाम की कठोर व्याख्या में विश्वास रखता है, लेकिन वह चाहता है कि अफगानिस्तान अंतरराष्ट्रीय समुदाय से जुड़े, आर्थिक हालात सुधारे जाएं और लड़कियों व महिलाओं को कम से कम बुनियादी शिक्षा का अधिकार मिले। वर्तमान में प्राथमिक स्तर के बाद लड़कियों की शिक्षा पर रोक लगी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इंटरनेट बैन, सत्ता का केंद्रीकरण और नीतिगत असहमति ने इन मतभेदों को उजागर करने का काम किया है। यदि तालिबान नेतृत्व इन दरारों को पाटने में नाकाम रहा, तो अफगानिस्तान में एक और बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा हो सकता है। हिदायत/ईएमएस 16जनवरी26