अंतर्राष्ट्रीय
18-Jan-2026
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नई दिल्ली,(ईएमएस)। इंटरनेशनल वाटर में ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स हमारे जहाज का पीछा कर रहे हैं…...यह आखिरी शब्द थे, जो 8 दिसंबर 2025 को वैलेंट रोर टैंकर के कमांडर ने अपने भाई कैप्टन विनोद परमार से फोन पर कहे। इस दौरान उनकी आवाज कांप रही थी फिर बातचीत अधूरी रह गई और अचानक कॉल कट गया। इसके बाद जो हुआ, वह 16 भारतीय नाविकों और उनके परिवारों के लिए एक भयावह सपने में बदल गया। परिजनों का आरोप है कि इंटरनेशनल वाटर में मौजूद टैंकर पर ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (आईआरजीसी) ने बिना किसी उकसावे के गोलीबारी की, जहाज को जब्त कर क्रू को बंधक बना लिया। जहाज पर कुल 18 क्रू मेंबर थे, जिसमें 16 भारतीय, एक श्रीलंकाई और एक बांग्लादेशी नागरिक शामिल थे। डेढ़ महीने से अधिक समय बीतने के बावजूद कई भारतीय नाविक आज भी ईरान में हिरासत में हैं, बाहरी दुनिया से पूरी तरह कटे हुए। यह घटना 8 दिसंबर की दोपहर यूएई के डिब्बा पोर्ट के पास हुई। दुबई की कंपनी ग्लोरी इंटरनेशनल द्वारा संचालित वैलेंट रोर टैंकर तकनीकी खराबी के बाद अपनी पहली यात्रा पर था और खोर फक्कन की ओर बढ़ रहा था। तभी आईआरजीसी ने उसका पीछा शुरू किया। जहाज के चीफ ऑफिसर अनिल कुमार सिंह की पत्नी गायत्री ने बताया कि दोपहर करीब तीन बजे उनके पति का घबराया हुआ फोन आया, जिसमें गोलियों की आवाजें साफ सुनाई दे रही थीं। इसके बाद संपर्क पूरी तरह टूट गया। कैप्टन परमार के अनुसार, गोलीबारी से जहाज को नुकसान पहुंचा और कुछ क्रू मेंबर घायल भी हुए। इसके बाद ईरानी सैनिक जहाज पर चढ़े, क्रू से मारपीट की और सभी को हिरासत में ले लिया। ईरान ने आरोप लगाया कि जहाज छह मिलियन लीटर डीजल की तस्करी कर रहा था, जबकि क्रू का कहना है कि जहाज में केवल बहुत कम सल्फर वाला फ्यूल ऑयल मौजूद था। सैंपल रिपोर्ट को भी नजरअंदाज कर जहाज को ओमान की खाड़ी के पास स्थित ईरानी बंदरगाह बंदर-ए-जास्क ले जाया गया। क्रू मेंबर्स को एक ही कमरे में बंद किया गया। मोबाइल, लैपटॉप और सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए। केवल जहाज के कैप्टन को रोज कुछ मिनट के लिए कॉल की अनुमति दी जाती थी। परिवारों का कहना है कि आज तक न हिरासत का कोई औपचारिक आदेश दिया गया है और न ही जब्ती का स्पष्ट कारण बताया गया। 6 जनवरी को हालात और बिगड़ गए, जब 18 में से 10 क्रू मेंबर्स को बयान के बहाने ईरान के भीतर ले जाकर बंदर अब्बास जेल भेज दिया गया। इनमें कई भारतीय इंजीनियर भी शामिल हैं। इसके बाद से कई परिवारों का अपने परिजनों से कोई संपर्क नहीं हो पाया है। चिंता, डर और अनिश्चितता ने परिवारों को तोड़ दिया है। परिजन लगातार विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास से मदद की गुहार लगा रहे हैं। अब मामला दिल्ली हाईकोर्ट तक पहुंच गया है, जिसने केंद्र सरकार से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। गुरुवार को विदेश मंत्रालय ने संकेत दिए कि ईरान में फंसे भारतीयों को वापस लाने की तैयारी चल रही है। आशीष/ईएमएस 18 जनवरी 2026