21-Jan-2026
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मुंबई,(ईएमएस)। कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) द्वारा मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना को समर्थन दिए जाने के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने बड़ा खुलासा करते हुए कहा है कि यह फैसला एमएनएस प्रमुख राज ठाकरे का नहीं, बल्कि पार्टी के स्थानीय नेताओं का है। सांसद संजय राउत ने बुधवार 21 जनवरी को मीडिया से बातचीत में दावा किया कि राज ठाकरे इस घटनाक्रम से बेहद नाराज और व्यथित हैं। उन्होंने कहा, राज ठाकरे बहुत व्यथित हैं जिस तरह से स्थानीय नेताओं ने यह फैसला लिया है। उनका साफ कहना है कि इस फैसले में उनकी भूमिका नहीं है और न ही पार्टी की आधिकारिक भूमिका है। संजय राउत के मुताबिक, राज ठाकरे का मानना है कि यदि स्थानीय नेताओं ने पार्टी लाइन के खिलाफ जाकर निर्णय लिया है, तो उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। संजय राउत ने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे अंबरनाथ में कांग्रेस के 12 पार्षद बीजेपी के साथ चले गए थे और उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया था, उसी तरह पार्टी विरोधी गतिविधियों पर सख्त कदम उठाने चाहिए। उन्होंने कहा, हमारी पार्टी में भी जो पार्टी के खिलाफ काम करता है, उसे बाहर का रास्ता दिखाया जाता है। शिवसेना (यूबीटी) सांसद ने कल्याण-डोंबिवली के घटनाक्रम को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सत्ता के लिए महाराष्ट्र के साथ बेईमानी करने वालों के साथ जो भी खड़ा होता है, जनता उसे भी बेईमान मानती है। उन्होंने आरोप लगाया कि वहां के लोगों ने बहुत बड़ी गलती की है और इसका राजनीतिक खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ सकता है। गौरतलब है कि कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका में बहुमत के लिए 62 पार्षदों की जरूरत है। यहां शिवसेना के पास 52 और बीजेपी के पास 51 पार्षद हैं, जबकि एमएनएस के 5 पार्षद निर्णायक स्थिति में हैं। इसी कारण एमएनएस के समर्थन को सत्ता गठन के लिए अहम माना जा रहा है। श्रीकांत बोले- महायुति की सत्ता बनेगी वहीं, शिंदे गुट की ओर से प्रतिक्रिया देते हुए डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के बेटे और लोकसभा सांसद श्रीकांत शिंदे ने कहा कि एमएनएस ने महायुति को समर्थन दिया है। उन्होंने कहा कि बीजेपी, शिवसेना, एमएनएस और अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर यहां महायुति की सत्ता बनेगी और विकास के लिए जो भी साथ आना चाहता है, उसका स्वागत है। इस पूरे घटनाक्रम ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर नई बहस और हलचल पैदा कर दी है। हिदायत/ईएमएस 21जनवरी26