26-Jan-2026
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मुंबई (ईएमएस)। साल 1997 में फिल्म राजा की आएगी बारात से अपने करियर की शुरुआत करने वाली अभिनेत्री रानी मुखर्जी ने इन तीन दशकों में अपनी अलग पहचान बनाई है। करियर के शुरुआती दौर में अपनी भारी और कर्कश आवाज की वजह से उन्हें कई बार रिजेक्शन का सामना करना पड़ा। अभिनेत्री रानी मुखर्जी ने हिंदी सिनेमा में अपने 30 साल पूरे कर लिए हैं। इस मौके पर फिल्म निर्माता करण जौहर से बातचीत में रानी ने अपने करियर और निजी जिंदगी से जुड़े कई अनसुने किस्से साझा किए। रानी मुखर्जी ने इस दौरान करण जौहर का खास तौर पर आभार जताया। उन्होंने कहा कि जब इंडस्ट्री के कई निर्माता उनकी आवाज को लेकर संदेह में थे, तब करण जौहर ने उन पर भरोसा किया। रानी के मुताबिक, करण ने उन्हें यह समझाया कि उनकी आवाज कोई कमजोरी नहीं बल्कि उनकी सबसे बड़ी ताकत बन सकती है। करण जौहर के इसी भरोसे ने उन्हें अपनी असली आवाज को अपनाने और उसे अपनी पहचान का हिस्सा बनाने का हौसला दिया। बातचीत के दौरान रानी ने फिल्म गुलाम से जुड़ा एक पुराना किस्सा भी साझा किया। उन्होंने बताया कि उस फिल्म में उनकी आवाज डब करने का फैसला लिया गया था। रानी ने कहा कि उस समय वह नई कलाकार थीं और आमिर खान जैसे बड़े सुपरस्टार के साथ काम करना उनके लिए बहुत बड़ी बात थी। ऐसे में उनके पास इस फैसले पर आपत्ति जताने का कोई विकल्प नहीं था, लेकिन अंदर ही अंदर यह फैसला उन्हें काफी दर्द दे गया था। रानी ने आगे बताया कि बाद में निर्देशक विक्रम भट्ट से उन्हें पता चला कि उनकी आवाज डब करने का फैसला निर्देशक, निर्माता मुकेश भट्ट और आमिर खान ने मिलकर लिया था। बाद में आमिर खान ने भी उन्हें इस फैसले के पीछे की वजह समझाई और कहा कि कई बार फिल्म की बेहतरी के लिए कलाकारों को कुछ समझौते करने पड़ते हैं। आमिर ने सुपरस्टार श्रीदेवी का उदाहरण देते हुए कहा था कि उनकी भी कई फिल्मों में आवाज डब की गई, लेकिन इससे उनके करियर या स्टारडम पर कोई असर नहीं पड़ा। रानी ने कहा कि करण जौहर उन गिने-चुने निर्माताओं में से थे, जिन्होंने नए होने के बावजूद दबाव में आकर अपना रुख नहीं बदला। उन्होंने न सिर्फ रानी पर बल्कि उनकी आवाज पर भी पूरा भरोसा किया। सुदामा/ईएमएस 26 जनवरी 2026