:: जूनी इंदौर मुक्ति धाम में धूमधाम से मनाया गया कृष्ण जन्मोत्सव, 30 जनवरी को होगा दिवंगतों का अस्थि विसर्जन :: इन्दौर (ईएमएस)। सुख और दुख हमारे अंतर्मन की उपज हैं, और संसार दुखों का वह महासागर है जिससे केवल ईश्वर की भक्ति ही पार लगा सकती है। ये प्रेरक विचार भागवताचार्य पं. श्याम सुंदर शास्त्री ने जूनी इंदौर मुक्ति धाम सेवा समिति द्वारा आयोजित भागवत ज्ञानयज्ञ में व्यक्त किए। उन्होंने जोर देकर कहा कि मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु अहंकार है; पतन से बचने के लिए इसे कभी अपने पास नहीं फटकने देना चाहिए। कथा के दौरान मंगलवार को कृष्ण जन्मोत्सव और बाल लीलाओं के प्रसंग सुनाए गए, जिससे पूरा पाण्डाल भक्तिमय हो गया। पं. शास्त्री ने गोवर्धन पूजा की व्याख्या करते हुए बताया कि भगवान ने अपनी अंगुली पर पर्वत उठाकर इंद्र का अहंकार नष्ट किया और समाज को संगठित होकर बड़ी से बड़ी विपत्ति का सामना करने का संदेश दिया। कथा से पूर्व आचार्य इंद्रानंद क्षोत्रिय, अशोक-संध्या सारडा और अन्य भक्तों ने व्यास पीठ का पूजन किया। मोक्ष धाम स्थित महामृत्युंजय मंदिर में पं. राजेश तिवारी द्वारा भागवत का मूल पारायण भी किया जा रहा है। समिति ने जानकारी दी कि 28 जनवरी को रुक्मणी विवाह का भव्य प्रसंग मनाया जाएगा। कथा का समापन 29 जनवरी को होगा। विशेष रूप से, 30 जनवरी को मोक्ष धाम में रखी हुई दिवंगतों की अस्थियों का शास्त्रोक्त विधि से विसर्जन किया जाएगा। समिति ने परिजनों से आग्रह किया है कि वे अपने स्वजनों की अस्थियाँ 30 जनवरी से पूर्व यहाँ से ले जा सकते हैं। कथा प्रतिदिन दोपहर 1 से 4 बजे तक आयोजित की जा रही है। प्रकाश/27 जनवरी 2026