31-Jan-2026
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- कलयुग में भक्तों की मनोवांछा शीघ्र पूर्ण करते हैं पुरुष दानी तीर्थंकर श्री पार्श्वनाथ भगवान - राष्ट्र-संत श्री ललितप्रभ जी राष्ट्र-संत का जीवन को कैसे स्वर्ग बनाएं विषय पर सार्वजनिक प्रवचन आज उज्जैन, (ईएमएस)। राष्ट्र-संत महोपाध्याय श्री ललितप्रभ सागर जी महाराज एवं डॉ मुनि श्री शांति प्रिय सागर जी महाराज साध्वी जी की निश्रा सानिध्य में श्री अवंति पार्श्वनाथ तीर्थ में सप्तम ध्वजारोहण महोत्सव धूमधाम से संपन्न हुआ।अवंति पार्श्वनाथ तीर्थ जैन श्वेतांबर मारवाड़ी समाज ट्रस्ट के तत्वावधान में अवंती तीर्थ की सप्तम वर्षगांठ के उपलक्ष्य में तीर्थ के शिखर पर ध्वजारोहण का वरघोड़ा निकाला गया। दानी गेट से प्रारंभ हुए वरघोड़े में परमात्मा की पालकी, रथ, बैंड, ढोल बाजे के साथ दानी गेट से आरंभ होकर तीर्थ परमात्मा के आंगन में विभिन्न संगीत मंडल, बालिका मंडल, युवा मंडल, बहू मंडल के साथ में पहुंचा तत्पश्चात मूलनायक अवंति पार्श्वनाथ की मुख्य ध्वजा बैंगलोर निवासी संघवी कुशलराज उत्तमचन्द ललित कुमार गुलेच्छा परिवार ने अमर ध्वजा फहराई। चिंतामणि पार्श्वनाथ ध्वजा के लाभार्थी श्रीमती विजया हीरालाल जी राठौड़ बड़गांव निवासी आदेश्वर भगवान की ध्वजा के लाभार्थी श्री विमला देवी मांगीलाल मालू परिवार सूरत निवासी ने फहराई इस अवसर पर राष्ट्र-संत श्री ललितप्रभ जी ने कहा कि कलयुग में भक्तों की मनोवांछा शीघ्र पूर्ण करते हैं पुरुष दानी तीर्थंकर श्री पार्श्वनाथ भगवान। महापुरुषों में उत्तम और साक्षात चमत्कारी है भगवान पार्श्वनाथ। उनकी सेवा में एक ओर नाकोड़ा भेरूजी दूसरी ओर भोमिया बाबा और अधिष्ठायक धरणेंद्र देव व पद्मावती माता सेवा में रहते हैं। वर्तमान में 24 तीर्थंकरों में से सबसे ज्यादा तीर्थ पार्श्वनाथ भगवान के देश और विदेश में बने हुए हैं। जो भी भक्त उनके 108 तीर्थों की यात्रा कर लेता है उसके जीवन में आया हर संकट समाप्त हो जाता है उन्होंने कहा कि उज्जैन में विद्यमान अवंती पार्श्वनाथ तीर्थ विश्व का सबसे भव्य तीर्थ है जहां पर देशभर से लाखों श्रद्धालु आते हैं और यात्रा करके मनोवांछित फल पाते हैं। उन्होंने तीर्थ निर्माण के लिए गच्छाधिपति श्री जिन मणिप्रभ सागर जी और जैन श्वेतांबर मारवाड़ी मूर्तिपूजक समाज ट्रस्ट का अभिनंदन और अनुमोदन की। प्रभु तक कैसे पहुंचाएं अपनी प्रार्थना पर प्रवचन देते हुए उन्होंने कहा कि जिस ईश्वर ने हमें चौबीस घंटे दिए हैं उन्हें हम चौबीस मिनट अवश्य समर्पित करें। याद रखें, पति को पत्नी का आसरा है और पत्नी को पति का, पर अंत में दोनों को अगर किसी का आसरा है तो प्रभु का ही आसरा है। वह सुख में हमारे साथ रहता है, पर दुख में हमें अपनी गोदी में उठा लेता हैै। संघ के अध्यक्ष अशोक कोठारी ने बताया कि कल 1 फरवरी, रविवार को सुबह 9 से 11 तक विचक्षण भवन शांतिनाथ मंदिर, शांतिनाथ गली, छोटा सराफा में जीवन को कैसे स्वर्ग बनाएं विषय पर सत्संग-प्रवचन का सार्वजनिक आयोजन होगा। ध्वजारोहण महोत्सव में अवंति पार्श्वनाथ तीर्थ जैन श्वेतांबर मारवाड़ी समाज ट्रस्ट के पदाधिकारी मौजूद रहे । ईएमएस / 31 जनवरी 2026