अंतर्राष्ट्रीय
01-Feb-2026


वॉशिंगटन,(ईएमएस)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक महत्वपूर्ण बयान देते हुए कहा है कि भारत अब ईरान के बजाय वेनेजुएला से कच्चे तेल की खरीदारी करेगा। पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने यह टिप्पणी की, जो वैश्विक ऊर्जा व्यापार में आ रहे बड़े बदलावों की ओर स्पष्ट संकेत करती है। राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत अपने रिफाइनिंग सेक्टर की जरूरतों को पूरा करने के लिए सस्ते और विविध स्रोतों से कच्चे तेल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के विकल्प तलाश रहा है। इसका मतलब है कि दुनिया में ऊर्जा के क्षेत्र में काफी बदलाव होने की आशंका है और ट्रंप ने भारत और चीन को प्रस्ताव देकर कर दी शुरुआत कर दी है। डोनाल्ड ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक समीकरणों का जिक्र करते हुए कहा, चीन का स्वागत है, वह आगे आए और तेल को लेकर एक बड़ी डील करे। हम पहले ही एक समझौता कर चुके हैं। अब भारत भी आगे आ रहा है और वह ईरान से तेल खरीदने के बजाय वेनेजुएला से तेल खरीदेगा। इस सौदे की रूपरेखा पहले ही तय की जा चुकी है।भारत के लिए वेनेजुएला का कच्चा तेल सामरिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है। विशेष रूप से गुजरात में स्थित निजी क्षेत्र के बड़े रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स, जिनकी दैनिक प्रोसेसिंग क्षमता लगभग चौदह लाख बैरल है, इस बदलाव का मुख्य केंद्र बन सकते हैं। ये रिफाइनरियां तकनीकी रूप से भारी और सस्ते कच्चे तेल को प्रोसेस करने के लिए डिजाइन की गई हैं। वेनेजुएला का मेरे क्रूड इसी श्रेणी में आता है। पूर्व में भी भारतीय रिफाइनरियां अपना रिफाइनिंग मार्जिन बढ़ाने के लिए रियायती दरों पर इस भारी कच्चे तेल का उपयोग करती रही हैं। यह घटनाक्रम भारत द्वारा अपने तेल आयात संतुलन को साधने की एक बड़ी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, वॉशिंगटन द्वारा रूसी कच्चे तेल पर टैरिफ बढ़ाए जाने के बाद भारत ने रूस से तेल खरीद में कटौती करने का संकेत दिया है। सूत्रों का मानना है कि आने वाले महीनों में भारत रूसी तेल आयात में रोजाना कई लाख बैरल की कमी कर सकता है। अमेरिका की रणनीति स्पष्ट रूप से रूस के तेल निर्यात से होने वाली आय को सीमित करने की है, जिसका उपयोग यूक्रेन युद्ध में किया जा रहा है। इसी कड़ी में, अमेरिका ने नई दिल्ली को यह विकल्प दिया है कि वह रूसी और ईरानी आपूर्ति में होने वाली कमी की भरपाई वेनेजुएला से तेल आयात शुरू करके कर सकता है। गौरतलब है कि मार्च 2025 में ट्रंप प्रशासन ने वेनेजुएला से तेल खरीदने वाले देशों पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया था। इसके अलावा, वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के खिलाफ अमेरिकी बलों की कार्रवाई के बाद वहां के राजनीतिक हालात भी बदल चुके हैं। अब वॉशिंगटन के रुख में नरमी के संकेत मिल रहे हैं, जिससे भारत जैसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ताओं के लिए नए रास्ते खुले हैं। भारत अब प्रतिबंधों के दबाव और कीमतों की अस्थिरता के बीच अमेरिका के साथ अपने ऊर्जा सहयोग को एक नई दिशा देने की ओर अग्रसर है। वीरेंद्र/ईएमएस/01फरवरी2026 -----------------------------------