अंतर्राष्ट्रीय
01-Feb-2026


तेहरान,(ईएमएस)। ईरान के आसमान पर मंडराते युद्ध के बादलों ने आम जनजीवन को गहरे मानसिक तनाव में धकेल दिया है। अमेरिकी हमले की बढ़ती आशंका के बीच देश के भीतर डर और बेचैनी का माहौल है। 30 जनवरी की रात जैसे ही अंधेरा छाया, ईरान के भीतर और विदेशों में रह रहे ईरानियों के बीच यह खबर आग की तरह फैल गई कि वाशिंगटन किसी भी पल सैन्य कार्रवाई शुरू कर सकता है। सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं और अनपुष्ट अफवाहों ने लोगों की रातों की नींद छीन ली है। तेहरान में रहने वाले 43 वर्षीय इंजीनियर मिलाद की कहानी वहां के लाखों लोगों की मानसिक स्थिति को बयां करती है। मिलाद बताते हैं कि उस रात वह सुबह तक सो नहीं पाए। उन्हें हर पल किसी बड़े धमाके की आवाज सुनाई देने का डर सता रहा था। वे रात भर बार-बार जागकर खिड़की से बाहर यह सुनने की कोशिश करते रहे कि कहीं मिसाइल गिरने या बम फटने की गूंज तो नहीं आ रही। मिलाद का कहना है कि अब हर रात इसी दहशत में गुजरती है कि देखते हैं आज क्या होता है। पिछले एक हफ्ते से मध्य पूर्व में बड़े अमेरिकी सैन्य बेड़े की तैनाती और कड़े संकेतों ने इस चिंता को और हवा दी है। यह केवल सैन्य तनाव नहीं, बल्कि एक मानवीय संकट बनता जा रहा है। लोग खुलकर युद्ध पर चर्चा करने से बच रहे हैं, क्योंकि पिछले साल इजरायल के साथ हुए भीषण संघर्ष की यादें अब भी उनके जहन में ताजा हैं। फिर भी, एक अजीब सी चुप्पी छाई हुई है और हर कोई मानो पहले विस्फोट का इंतजार कर रहा है। सोशल मीडिया पर इन दिनों मिसाइल हमलों से बचने के तरीकों और आपातकालीन उपायों की भरमार है। जब भी इंटरनेट की स्थिति बेहतर होती है, डर और अफवाहें और तेजी से फैलने लगती हैं। कई परिवारों ने जरूरी राशन और सामान जमा करना शुरू कर दिया है, भले ही उन्हें यह स्पष्ट न हो कि खतरा कितना वास्तविक है। फिलहाल ईरान के शहरों में बाहरी तौर पर स्थिति सामान्य दिख रही है। पेट्रोल पंपों पर वैसी कतारें नहीं हैं जैसी अक्सर युद्ध की शुरुआत में देखी जाती हैं। दुकानें खुली हैं और बच्चे रोज की तरह स्कूल बस का इंतजार करते देखे जा सकते हैं। लेकिन इस सामान्य दिखने वाली तस्वीर के पीछे एक गहरी कसमसाहट छिपी है। लोगों के मन में यह कड़वा अहसास घर कर गया है कि उनकी जिंदगी और मौत अब वैश्विक शक्तियों के लिए सिर्फ एक खेल बनकर रह गई है। वीरेंद्र/ईएमएस/01फरवरी2026