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17-Feb-2026
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62 ईमेल व 14 मुलाकातों के राज पर घिरे पुरी, कांग्रेस ने मांगा इस्तीफा नई दिल्ली (ईएमएस)। कॉरपोरेट गवर्नेंस और नीतिगत पारदर्शिता के मुद्दे पर एक बार फिर राजनीतिक पारा चढ़ गया है। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और अमेरिकी फाइनेंसर तथा यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन के बीच कथित संबंधों को लेकर कांग्रेस ने मंगलवार को गंभीर आरोप लगाए। विपक्षी दल ने दावा किया है कि 2014 से 2017 के बीच दोनों के बीच 62 ईमेल का आदान-प्रदान हुआ और 14 मुलाकातें हुईं। यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें एक मौजूदा केंद्रीय मंत्री की जवाबदेही और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दागी व्यक्ति के साथ उनके संबंधों की प्रकृति पर सवाल उठाए गए हैं। कांग्रेस के मीडिया व प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन आंकड़ों को सार्वजनिक किया। खेड़ा के अनुसार कि हरदीप पुरी ने 32 ईमेल लिखे जबकि एपस्टीन ने उन्हें 30 ईमेल भेजे। इसके अलावा, जून 2014 में एनडीए सरकार के सत्ता में आने के तुरंत बाद मुलाकातों का दौर शुरू हुआ, जो 2017 तक चला। खेड़ा ने विशिष्ट तारीखों का हवाला देते हुए पूछा कि जून 5, 6, 8 और 9, 2014 को हुई बैठकों में क्या चर्चा हुई थी? कांग्रेस नेता की ओर से सबसे अहम सवाल यह उठाया गया कि जब हरदीप पुरी एक सामान्य नागरिक की हैसियत से मिल रहे थे, तो वे एपस्टीन के साथ सरकारी नीतियों को क्यों साझा कर रहे थे। कांग्रेस ने इस आधार पर मंत्री के तत्काल इस्तीफे और स्पष्टीकरण की मांग की है। भ्रामक दावों और कई बैठकों के आरोप पुरी के बयानों को गुमराह करने वाला बताते हुए खेड़ा ने कहा कि पुरी ने दावा किया कि जब वह पहली बार एपस्टीन से मिलने गए थे, तो उन्हें जगह का कोई अंदाजा नहीं था क्योंकि एक ड्राइवर उन्हें वहां ले जा रहा था। एपस्टीन से मिलने जाते समय मुझे थोड़ी बेचैनी महसूस हुई, इसलिए मैंने गूगल पर उस जगह के बारे में खोजा जहां मुझे जाना था और फिर खुद से पूछा कि क्या मुझे एपस्टीन से मिलने जाना चाहिए। उन्होंने पुरी के फैसले पर सवाल उठाते हुए पूछा कि जब यह सब हुआ तब क्या हरदीप सिंह पुरी बच्चे थे? पार्टी का रुख स्पष्ट करते हुए खेड़ा ने कहा कि यह दावा कि हरदीप सिंह पुरी एपस्टीन से केवल एक बार मिले थे, गलत है। वास्तव में, हरदीप सिंह पुरी एपस्टीन से कई बार मिले थे। उन्होंने एपस्टीन के आपराधिक रिकॉर्ड के संबंध में पुरी की टिप्पणियों का भी जिक्र किया। एपस्टीन द्वारा 2008 में अदालत में दोषी ठहराए जाने के बावजूद, पुरी ने कहा था कि हममें से कुछ लोगों को एपस्टीन के आपराधिक रिकॉर्ड पर संदेह था। खेड़ा ने जवाब दिया, एपस्टीन के कबूलनामे के बाद भी, हमारे मंत्री हरदीप पुरी को 2014 में संदेह था। वह एक मंत्री हैं, और यह उनके नैतिक मूल्यों का स्तर है। ऐसी स्थिति में, हरदीप पुरी को कैसे उचित ठहराया जा सकता है? इस विवाद की छाया दिल्ली में चल रहे हाई-प्रोफाइल एआई इम्पैक्ट पर भी पड़ती दिख रही है। पवन खेड़ा ने माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स की भागीदारी को लेकर सरकार पर कटाक्ष किया। खेड़ा ने कहा कि सरकारी सूत्र कह रहे हैं कि बिल गेट्स एआई समिट में नहीं आएंगे, जबकि गेट्स खुद कह रहे हैं कि वे आएंगे और भाषण देंगे। बता दें एपस्टीन फाइलों में गेट्स का भी जिक्र है, हालांकि उन पर किसी गलत काम का आरोप नहीं है। जेफ्री एपस्टीन की 2019 में हिरासत में मौत के बाद से, उससे जुड़े हजारों दस्तावेज और ईमेल वैश्विक स्तर पर जांच का विषय रहे हैं। भारत में एक वरिष्ठ मंत्री का नाम इन फाइलों से जुडऩा न केवल राजनीतिक बल्कि कूटनीतिक और नैतिक दृष्टिकोण से भी संवेदनशील है। अब यह देखना होगा कि सरकार इन तारीखों और ईमेल के आंकड़ों पर क्या आधिकारिक स्पष्टीकरण देती है। विनोद/ईएमएस/17/02/2026