अंतर्राष्ट्रीय
22-Feb-2026


वॉशिंगटन(ईएमएस)। मिडिल ईस्ट में गहराते युद्ध के बादलों के बीच ईरान की दहलीज पर तैनात अमेरिकी सैन्य अड्डों से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने दुनिया भर के सामरिक विशेषज्ञों को चौंका दिया है। पूर्व न्यूयॉर्क लेजिस्लेटर और मीडिया रणनीतिकार बेन गेलर द्वारा किए गए दावों के अनुसार, मिडिल ईस्ट के विभिन्न मोर्चों पर तैनात अमेरिकी सैनिकों को रात के खाने में लॉबस्टर, क्रैब लेग्स, स्टेक और पाई जैसे आलीशान व्यंजन परोसे गए हैं। रक्षा गलियारों में इसे महज एक सामान्य भोजन नहीं, बल्कि पावर डिनर के रूप में देखा जा रहा है, जो अक्सर किसी बड़े सैन्य ऑपरेशन या भीषण संघर्ष से ठीक पहले की परंपरा रही है। इतिहास गवाह है कि युद्ध के मुहाने पर खड़े सैनिकों को ऐसा शाही भोजन देना मनोवैज्ञानिक युद्ध का एक अहम हिस्सा होता है। ईरान की सीमाओं के करीब इस तरह की दावत के जरिए अमेरिका ने कई कूटनीतिक संदेश देने की कोशिश की है। सबसे पहला संदेश उसकी अचूक लॉजिस्टिक्स शक्ति का है। ईरान के पड़ोस जैसे तनावपूर्ण क्षेत्र में ताजा समुद्री भोजन और उच्च श्रेणी के मांस की निर्बाध आपूर्ति करना यह दर्शाता है कि अमेरिकी सप्लाई चेन कितनी मजबूत और सक्रिय है। दूसरा महत्वपूर्ण पहलू सैनिकों का हाई मोरल यानी मनोबल है। भीषण तनाव और अनिश्चितता के माहौल में अपने जवानों को श्रेष्ठ भोजन उपलब्ध कराना उनकी मानसिक मजबूती को सातवें आसमान पर ले जाने की एक सोची-समझी सैन्य रणनीति का हिस्सा है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच जुबानी जंग और धमकियों का दौर चरम पर है। ईरान द्वारा बार-बार अमेरिका को क्षेत्र छोड़ने की दी जा रही चेतावनियों के बीच बेन गेलर का यह खुलासा ईरान के रणनीतिकारों के लिए सिरदर्द बन सकता है। शाही खाने की यह मेज यह स्पष्ट संदेश दे रही है कि अमेरिका पीछे हटने के मूड में बिल्कुल नहीं है और उसके तरकश में हर तरह के तीर तैयार हैं। आने वाले कुछ दिन यह तय करेंगे कि यह पावर डिनर शांति की आखिरी कोशिश थी या किसी बड़े तूफान से पहले की खामोशी। पावर डिनर सीधे तौर पर दुश्मन को चेतावनी विशेषज्ञों का मानना है कि जब कोई सेना अपनी मेस में अचानक बेहतरीन और महंगे पकवान परोसना शुरू कर दे, तो यह संकेत होता है कि वे अपने सबसे कठिन और निर्णायक मिशन के लिए मानसिक रूप से तैयार हो रहे हैं। यह पावर डिनर सीधे तौर पर दुश्मन को यह चेतावनी देता है कि अमेरिकी सेना किसी भी लंबे और भीषण संघर्ष के लिए न केवल पूरी तरह तैयार है, बल्कि संसाधनों के मामले में भी आत्मनिर्भर है। मिडिल ईस्ट में इस समय हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं, जहां एक ओर ईरान समर्थित गुटों के हमले तेज हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पेंटागन की यह खामोश तैयारी किसी बड़े सैन्य फैसले की ओर इशारा कर रही है। वीरेंद्र/ईएमएस/22फरवरी2026