अंतर्राष्ट्रीय
22-Feb-2026


बेलग्रेड,(ईएमएस)। मिडिल ईस्ट में गहराते सैन्य तनाव और युद्ध की बढ़ती आशंकाओं के बीच यूरोपीय देशों में हड़कंप मच गया है। पोलैंड के बाद अब सर्बिया ने भी अपने नागरिकों के लिए सख्त एडवाइजरी जारी करते हुए उन्हें जल्द से जल्द ईरान छोड़ने की अपील की है। सर्बियाई विदेश मंत्रालय ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर जारी एक बयान में स्पष्ट किया है कि सुरक्षा व्यवस्था की लगातार बिगड़ती स्थिति को देखते हुए सर्बियाई नागरिकों को ईरान की यात्रा न करने की सलाह दी जाती है। साथ ही, जो लोग वर्तमान में ईरान में मौजूद हैं, उन्हें सुरक्षा कारणों से जितनी जल्दी हो सके देश छोड़ने के लिए कहा गया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका ने पिछले 22 वर्षों में मिडिल ईस्ट में अपनी अब तक की सबसे बड़ी सैन्य तैनाती कर दी है। दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के परमाणु कार्यक्रमों पर सीधे सैन्य कार्रवाई की दी जा रही धमकियों ने दुनिया भर के देशों को चौकन्ना कर दिया है। सामरिक विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब उस मोड़ पर पहुंच गया है जहां से पूर्ण स्तर के युद्ध की वापसी मुश्किल नजर आ रही है। सर्बिया से पहले पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने भी इसी तरह की चेतावनी जारी की थी। टस्क ने पोलिश नागरिकों से अपील करते हुए कहा था कि वर्तमान स्थिति को देखते हुए किसी को भी ईरान में नहीं रुकना चाहिए, क्योंकि यदि हथियारों से लैस संघर्ष शुरू होता है, तो कुछ ही घंटों के भीतर वहां से सुरक्षित निकलना लगभग नामुमकिन हो जाएगा। पोलैंड की सरकार ने अपने नागरिकों को आगाह करते हुए कहा है कि पूर्व के अनुभवों से यह साफ है कि लोग अक्सर ऐसी आधिकारिक चेतावनियों को कम आंकते हैं, जिसके परिणाम घातक हो सकते हैं। हालांकि पोलैंड ने अपने नागरिकों की सटीक संख्या साझा नहीं की है, लेकिन प्रधानमंत्री टस्क का बयान लड़ाई की आशंका की ओर सीधा इशारा करता है। उधर, तेहरान में भी स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। दिसंबर 2025 के अंत और जनवरी 2026 की शुरुआत में देश के भीतर हुए बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों ने शासन के लिए आंतरिक चुनौतियां पहले ही पैदा कर दी थीं, और अब बाहरी सैन्य खतरा इस संकट को और गहरा रहा है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यदि वाशिंगटन ईरान पर हमला करने का अंतिम फैसला लेता है, तो पेंटागन के पास कई रणनीतिक विकल्प तैयार हैं। इनमें ईरान के परमाणु ठिकानों पर सीमित और सटीक हवाई हमलों से लेकर कई हफ्तों तक चलने वाले बड़े सैन्य अभियान तक शामिल हो सकते हैं। कुछ सैन्य योजनाओं में तेहरान के शीर्ष नेतृत्व को सीधे निशाना बनाने की बात भी कही जा रही है। युद्ध के इन बादलों के बीच कई देशों द्वारा अपने दूतावासों को खाली करने और नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकालने की कवायद यह संकेत दे रही है कि कूटनीति के दरवाजे लगभग बंद हो चुके हैं और अब गेंद पूरी तरह से सैन्य कमांडरों के पाले में है। वीरेंद्र/ईएमएस/22फरवरी2026