22-Feb-2026
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-ऑपरेशन सिंदूर में दिखा था 88 घंटे का पूर्ण समन्वय नई दिल्ली,(ईएमएस)। देश की सैन्य संरचना में आजादी के बाद का सबसे बड़ा बदलाव अब अंतिम चरण में है। थलसेना, वायुसेना और नौसेना को एकीकृत करते हुए संयुक्त थिएटर कमान (जेटीसी) के तहत संचालन का खाका तैयार कर लिया गया है। पिछले पांच वर्षों से इस पर मंथन चल रहा था और सूत्रों के अनुसार नया ढांचा अगले तीन महीनों में औपचारिक रूप से सामने आ जाएगा। नए मॉडल के लागू होने के बाद भारत के पास किसी भी सैन्य संघर्ष से निपटने के लिए अधिक इंटीग्रेटेड, तेज और समन्वित कमांड संरचना होगी। रक्षा सूत्रों का दावा है कि निर्णय लेने की प्रक्रिया में 60 से 70 प्रतिशत तक तेजी आएगी, जबकि संसाधनों के बेहतर उपयोग से 15 से 20 प्रतिशत तक बचत संभव होगी। इससे चीन और पाकिस्तान—दोनों मोर्चों पर रणनीतिक तैयारी और मजबूत होगी। दुनिया के कई प्रमुख देशों में पहले से ही संयुक्त थिएटर कमान व्यवस्था लागू है। अमेरिका, चीन, रूस, फ्रांस और ब्रिटेन की सेनाएं थिएटर कमान के तहत संचालित होती हैं। चीन में पांच और अमेरिका में 11 थिएटर कमान सक्रिय हैं। पांच टकरावों के अनुभव से बना नया ढांचा पिछले एक दशक में पाकिस्तान और चीन के साथ हुए पांच बड़े सैन्य टकरावों के अनुभवों ने इस ढांचे को आकार दिया है। इनमें 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक, 2019 की बालाकोट एयर स्ट्राइक, 2017 का डोकलाम विवाद, 2020 का गलवान संघर्ष और 2025 में 88 घंटे चला ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शामिल हैं। इन घटनाओं के दौरान समन्वय, संचार और संसाधन प्रबंधन से जुड़े कई व्यावहारिक सबक सामने आए। सैन्य अधिकारियों के अनुसार, अलग-अलग सेनाओं की स्वतंत्र कार्रवाई के दौरान कम्युनिकेशन गैप और संसाधनों के ओवरलैप जैसी चुनौतियां महसूस की गईं। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में पहली बार 88 घंटों के भीतर तीनों सेनाओं का पूर्ण एकीकरण देखने को मिला, जहां मिसाइल स्ट्राइक, ड्रोन स्वार्म, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और जमीनी कार्रवाई में प्रभावी तालमेल रहा। 1947 के बाद सबसे बड़ा ओवरहॉल रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल एस.एल. नरसिम्हन के अनुसार यह 1947 के बाद भारतीय सैन्य ढांचे का सबसे बड़ा ओवरहॉल होगा। मई 2026 तक पहली थिएटर कमान के सक्रिय होने की संभावना है। इसके तहत प्रत्येक थिएटर में साइबर, स्पेस और स्पेशल ऑपरेशंस की सब-कमान होंगी। तीनों सेनाओं के लिए कॉमन सप्लाई चेन और मेंटेनेंस सिस्टम विकसित किया जाएगा, साथ ही इंटेलिजेंस फ्यूजन सेंटर स्थापित किए जाएंगे। नए ढांचे में दो मोर्चों पर युद्ध की स्थिति के लिए स्पष्ट प्रोटोकॉल, संसाधन साझा करने की स्वचालित व्यवस्था और हर थिएटर में साल में कम से कम दो फुल-स्केल जॉइंट एक्सरसाइज अनिवार्य होंगी। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह संरचना भारतीय सशस्त्र बलों को ‘थिएटर-रेडी’ बनाते हुए भविष्य की चुनौतियों के लिए अधिक सक्षम और चुस्त बनाएगी। हिदायत/ईएमएस 22फरवरी26