-1980 के दशक में आई आर्थिक क्रांति, आज उसकी प्रगति देख सभी हैरान नई दिल्ली,(ईएमएस)। चीन, अमेरिका के बाद दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। आज चीन के बगैर दुनिया में कारोबार की कल्पना नहीं की जा सकती है उसकी आर्थिक प्रगति का असर वहां के जीवन स्तर में सुधार और उसकी मिलिट्री पावर में नजर आती है, लेकिन ऐसा नहीं था कि चीन हमेशा या सदियों से अमीर था। वह एक बहुत गरीब मुल्क था। यह बात बहुत पुरानी भी नहीं है। 1980 के दशक के वक्त चीन में आर्थिक क्रांति की इबादत लिखने का काम शुरू हुआ और आज यह मुल्क दुनिया का बादशाह बनने की ओर अग्रसर है। उस वक्त तमाम आर्थिक मानकों पर भारत, चीन से आगे था। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बीते करीब तीन दशक में भारत ने भी आर्थिक प्रगति की है। ग्लोबलाइजेशन और उदारीकरण के साथ खुले बाजार की नीति से भारत में काफी फायदा हुआ है। भारत में उच्च मध्यवर्ग श्रेणी के लोगों का एक तबका विकसित हो गया है। इसके बावजूद हम विकास के तमाम मानकों में चीन से बहुत पीछे हैं। आज चीन में प्रति व्यक्ति आय 13,806 डॉलर है जबकि भारत में यह आंकड़ा केवल 2,878 डॉलर का है। रुपए में देखें तो चीन के हर एक व्यक्ति की सालाना आय करीब 12.50 लाख रुपए है। वहीं भारत में प्रति व्यक्ति आय 2.62 लाख रुपए के आसपास है, लेकिन, ऐसा नहीं है कि हमेशा से चीन भारत से आगे रहा है। एक वक्त ऐसा भी था जब भारत में प्रति व्यक्ति आय, चीन की तुलना में करीब-करीब डबल थी। यह बात बहुत पुरानी नहीं है। यह पूरा फासला 1960 से 1990 के दशक की गतिविधियों से पैदा हुआ। 1970-80 के दशक चीन में प्रति व्यक्ति आय करीब-करीब दुनिया में सबसे कम थी। उसकी तुलना अफ्रीकी देशों से की जाती थी। वर्ल्ड बैंक के आंकड़ों के मुताबिक 1980 में चीन में प्रति व्यक्ति आय 307 डॉलर सालाना थी यानी उस वक्त चीन के लोग औसतन दिन के एक डॉलर भी नहीं कमा पाते थे। वहीं उस वक्त भारत में प्रति व्यक्ति आय 582 डॉलर थी, जो चीन के लोगों की औसत आय से करीब-करीब दोगुनी थी, लेकिन इसी दौरान चीन ने अपनी अर्थव्यवस्था को दुनिया के लिए खोल दिया। चीन ने 1978 में आर्थिक सुधार की नीति लागू की और फिर देश में तेज गति से औद्योगिक प्रगति हुई। इसका सीधा लाभ वहां लोगों के जीवन स्तर में सुधार के रूप में देखा गया और देखते ही देखते चीन में एक तरह की क्रांति आ गई। चीन ने 1978 में आर्थिक सुधार लागू करने के साथ स्पेशल इकोनॉमिक जोन बनाए। कृषि क्षेत्र में व्यापक सुधार किया। इस कारण महज पांच साल में ग्रामीण इलाकों की आय दोगुनी हो गई। 1991 में भारत और चीन के लोगों की आय करीब-करीब बराबर हो गई1 चीन में आर्थिक सुधार लागू होने के करीब 13 साल भारत भी इसी राह पर चल निकला। भारत में 1991 में आर्थिक सुधार लागू हुए, लेकिन तब तक चीन की गाड़ी रफ्तार पकड़ चुकी थी। दूसरी तरफ भारत में वह दौर राजनीतिक अस्थिरता का रहा। 1991 में पीएम नरसिम्हा राव की सरकार में मनमोह सिंह वित्त मंत्री थे। उन्होंने इसे लागू किया लेकिन उसकी रफ्तार कभी भी चीन की तरह मुकम्मल नहीं रही। चीन ने अपने आर्थिक सुधार के दौरान लार्ज स्कैल मैनुफैक्चरिंग पर फोकस किया। व्यापक स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर बनाया और पूरी अर्थव्यवस्था को निर्यात आधारित बनाया। इस दौरान उसकी जीडीपी विकास दर अधिकतर समय आठ फीसदी की रही। इस तहत साल 2000 आते-आते चीन दुनिया की एक बड़ी आर्थिक ताकत बन गया। आज भी चीन नए-नए तरीके इस्तेमाल कर दुनिया की सबसे मजबूत अर्थव्यवस्था की और बढ़ रहा है। सिराज/ईएमएस 23 फरवरी 2026