अंतर्राष्ट्रीय
23-Feb-2026
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वॉशिंगटन(ईएमएस)। मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और ईरान के साथ जारी रस्साकशी के बीच संयुक्त राज्य अमेरिका ने अपनी सैन्य तैयारियों को लेकर एक बेहद आक्रामक रुख अपनाया है। अमेरिकी वायुसेना ने अपने बेड़े के सबसे भारी और विनाशकारी बंकर बस्टर बम, जीबीयू-57 मैसिव ऑर्डनेंस पेनिट्रेटर (एमओपी) की नई खेप खरीदने का निर्णय लिया है। यह वही घातक हथियार है जिसने पिछले साल ऑपरेशन मिडनाइट हैमर के दौरान ईरान के भूमिगत परमाणु ठिकानों को निशाना बनाकर दुनिया भर में खलबली मचा दी थी। ताजा आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, अमेरिकी वायुसेना दिग्गज विमानन कंपनी बोइंग के साथ लगभग 100 मिलियन डॉलर के रक्षा सौदे को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है। विशेष बात यह है कि यह अनुबंध सिंगल सोर्स श्रेणी के तहत सीधे बोइंग को दिया जा रहा है, क्योंकि केवल इसी कंपनी के पास इस विशिष्ट और जटिल बम के निर्माण की तकनीक और बुनियादी ढांचा उपलब्ध है। वायुसेना का तर्क है कि किसी अन्य वेंडर को इस प्रक्रिया में शामिल करने से उत्पादन में अनावश्यक देरी होगी, जो वर्तमान वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य और देश की युद्ध तैयारियों के लिए जोखिम भरा हो सकता है। इस बड़े सौदे की पृष्ठभूमि में जून 2025 का वह भीषण हमला है, जिसे ऑपरेशन मिडनाइट हैमर के नाम से जाना जाता है। इजरायल और ईरान के बीच चले 12 दिनों के युद्ध के बाद अमेरिका ने सीधे हस्तक्षेप करते हुए ईरान के फोर्दो और नतांज स्थित परमाणु केंद्रों पर हमला किया था। इस गुप्त मिशन में सात बी-2 स्पिरिट स्टील्थ बमवर्षकों का उपयोग किया गया था, जिनमें से प्रत्येक ने दो-दो एमओपी बम गिराए थे। कुल 14 बमों के उस प्रहार ने जमीन के सैकड़ों फीट नीचे बनी सुरक्षित कंक्रीट की संरचनाओं को भेद दिया था। जीबीयू-57 एमओपी कोई साधारण बम नहीं है। लगभग 30,000 पाउंड (13,600 किलो) वजनी इस बम में 5,740 पाउंड का उच्च-क्षमता वाला वारहेड होता है। यह विशेष रूप से उन ठिकानों के लिए बनाया गया है जिन्हें सामान्य हवाई हमलों से तबाह नहीं किया जा सकता। यह बम मजबूत कंक्रीट की परतों को 200 फीट तक गहराई में जाकर नष्ट करने की क्षमता रखता है। वायुसेना के दस्तावेजों में स्पष्ट किया गया है कि पिछले ऑपरेशन में इस्तेमाल हुए बमों के स्टॉक की भरपाई करना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अनिवार्य है। नई खेप की डिलीवरी जनवरी 2028 से शुरू होने की उम्मीद है, हालांकि सुरक्षा कारणों से खरीदे जाने वाले बमों की सटीक संख्या को गोपनीय रखा गया है। जानकारों का मानना है कि यह खरीद एक अस्थायी रणनीति का हिस्सा है, क्योंकि अमेरिका अब नेक्स्ट जेनरेशन पेनिट्रेटर विकसित कर रहा है, जो भविष्य के बी-21 रेडर जैसे स्टील्थ विमानों के अनुकूल होगा। वर्तमान में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका एक तरफ परमाणु बातचीत का विकल्प खुला रख रहा है, तो दूसरी तरफ सैन्य शक्ति का प्रदर्शन कर यह स्पष्ट संदेश दे रहा है कि समझौता न होने की स्थिति में कड़ी कार्रवाई के लिए उसके तरकश में तीर तैयार हैं। वीरेंद्र/ईएमएस 23 फरवरी 2026