मेक्सिको में कुख्यात ड्रग सरगना नेमेंसियो ओसेगेरा सर्वांतेस उर्फ ‘एल मेंचो’ के मारे जाने की खबर के बाद हुई भारी हिंसा से मेक्सिको को अनिश्चितता के दौर में लाकर खड़ा कर दिया है। आम जनता सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करती नजर आई है। नशे के कारोबार में (सीजेएनजी) प्रमुख के रूप में ड्रग लॉर्ड को न केवल मेंक्सिको, बल्कि अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क का केंद्रीय चेहरा माना जाता था। मेक्सिको की सरकार इस कार्रवाई को बड़ी उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत कर रही है। किंतु ड्रग सरगना के मारे जाने के तुरंत बाद भड़की आगजनी, हाईवे जाम और सुरक्षा कर्मियों पर हमले से यह सवाल उठता है, क्या किसी सरगना के मारे जाने पर जनता का विद्रोह इस रूप में देखने को मिल सकता है? एल मेंचो पर अमेंरिका की सरकार ने बड़ा इनाम घोषित किया था। डोनाल्ड ट्रम्प के कार्यकाल से ही मेक्सिको पर ड्रग तस्करी के खिलाफ कठोर कार्रवाई का दबाव अमेंरिका की सरकार बनाती रही है। फेंटानिल संकट ने अमेंरिका की आंतरिक राजनीति को झकझोर दिया है, इसका प्रभाव द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ना तय है। मेक्सिको की हिंसा केवल आंतरिक सुरक्षा का प्रश्न नहीं है, बल्कि इसका असर अमेंरिका सहित अन्य देशों पर भी पड़ना तय है। यह घटना भू-राजनीतिक समीकरणों से भी जुड़ी दिखती है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है, क्या यह मेक्सिको की संप्रभु रणनीति का हिस्सा है, या अमेंरिकी दबाव का परिणाम है। इतिहास बताता है कि कार्टेल के शीर्ष नेता को मार देने से इस समस्या का हल नहीं होता है। इससे ड्रग के कारोबार, राजनीतिक एवं सामाजिक संबंधों में स्थिरता संभव नहीं है। 2016 में जोक्विन एल चापो गुजमान की गिरफ्तारी के बाद भी बड़े पैमाने पर हिंसा हुई थी। आम जनता और सत्ता के बीच संघर्ष बढ़ा था। संगठित अपराध का नेटवर्क समानांतर व्यवस्था की तरह संचालित होता है। एक चेहरा हटता है, तो उसके कई दावेदार उभरते हैं। गैंग में वर्चस्व की लड़ाई आम नागरिकों की सुरक्षा और जीवन यापन के लिए सबसे बड़ा खतरा बनती है। एल मेंचो की मौत के बाद इस तरह की घटनाएं इसी आशंका को पुष्ट कर रही हैं। ड्रग कारोबार और राजनीतिक संरक्षण का मूल मेक्सिको, अमेंरिका एवं कई अन्य देशों तक फैला हुआ है। दशकों से मेक्सिको में फैली गरीबी, बेरोजगारी, राजनीतिक संघर्ष, भ्रष्टाचार और कमजोर तथा भ्रष्ट न्यायिक व्यवस्था से जुड़ता है। मेक्सिको के सीमावर्ती इलाकों में प्रशासनिक पकड़ हमेंशा से कमजोर रही है। नशे के कारोबारी और इससे जुड़े हुए लोगों की समानांतर सत्ता चलती है। नशे के कारोबार में लगे अपराधी तत्व जिस तरह से काम करते हैं, उससे स्थानीय कारोबारियों को वसूली के डर से नियंत्रण और सीमापार तस्करी इनके साधन हैं। ऐसे में सैन्य कार्रवाई समाधान नहीं हो सकती है। मेक्सिको सरकार के लिए यह दोहरी चुनौती है। एक ओर सरकार के ऊपर तत्काल कानून-व्यवस्था बहाल कर नागरिकों में भरोसा कायम करना है, दूसरी ओर दीर्घकालिक सुधारों पर गंभीरता से काम करना होगा। मेक्सिको में न्यायिक पारदर्शिता, गवाहों की सुरक्षा, नशे की कारोबार में नेटवर्क पर वित्तीय प्रहार और पुलिस सुधार अनिवार्य है। सरकार, पुलिस और प्रशासन के बीच का भ्रष्टाचार रोकना, संस्थागत ढांचे को मजबूत नहीं किया तो यह “जीत” अस्थायी साबित होगी। इसके साथ ही, इसका असर अमेंरिका में भी पड़ना तय है। अमेंरिका की सुरक्षा एजेंसियों और सरकार को भी आत्ममंथन करने की जरूरत है। जब तक अमेंरिका में नशीली दवाओं की मांग बनी रहेगी, आपूर्ति के नए रास्ते और नए गिरोह समय-समय पर उभरते रहेंगे। नशे का कारोबार केवल मेक्सिको की समस्या नहीं है। यह अंतरराष्ट्रीय समस्या है। इससे निपटने के लिए साझा जिम्मेंदारी जरूरी है। दबाव की नीति के बजाय सहयोग, खुफिया साझेदारी और सामाजिक पुनर्वास कार्यक्रमों पर ध्यान देना होगा। एल मेंचो का अंत प्रतीकात्मक जीत हो सकती है, असली परीक्षा तो अब शुरू होगी। यदि मेक्सिको में सुशासन और पारदर्शिता चाहिए तो भुखमरी और बेरोजगारी को दूर करने के लिए सामाजिक निवेश की ठोस रणनीति बनानी होगी। तभी नशे के कारोबार के गैंगस्टरों की छाया से मेक्सिको बाहर निकल पाएगा। इतिहास खुद को दोहराने में देर नहीं करता है। नशे के कारोबार का अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्क है, इसमें भारी पैसा है। इस नेटवर्क को इस तरह से खत्म नहीं किया जा सकता है, जिस तरह से अभी कार्रवाई की गई है। कार्यवाही के पश्चात जिस तरह के हालात मेक्सिको के बन गए हैं, उस चुनौती से निपटना सरकार की सबसे बड़ी चुनौती है। अमेरिका इस मामले में मेक्सिको की क्या मदद करता है, यह भी देखना होगा। ईएमएस / 24 फरवरी 25