24-Feb-2026
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जांच के लिए बनाई गई कमेटी, अप्रैल में सौंपी जाएगी रिपोर्ट नई दिल्ली,(ईएमएस)। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ईसरो) के हालिया मिशनों में आई तकनीकी बाधाओं और विफलता की खबरों ने देश के सुरक्षा गलियारों में चिंता बढ़ा दी है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल के हालिया इसरो दौरे के बाद अब मामले में एक नया मोड़ आता दिख रहा है। इसकी जांच के लिए एक कमेटी बनाई गई है। पूर्व प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के. विजयराघवन और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व अध्यक्ष एस. सोमनाथ को शामिल कर विशेष समिति का गठन किया गया है। यह समिति इसरो के ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान यानी पीएसएलवी की लगातार विफलताओं के पीछे के प्रणालीगत मुद्दों और संगठनात्मक समस्याओं की जांच करेगी। हालिया विफलताएं जिनका होगा विश्लेषण पीएसएलवी-सी62 (12 जनवरी, 2026) में यह मिशन 16 सैटेलाइट को कक्षा में स्थापित करने में विफल रहा। रॉकेट का तीसरा चरण प्रज्वलित नहीं हो सका, जिसके कारण यह समुद्र में जा गिरा। पीएसएलवी-सी61 (18 मई, 2025) को ठीक इसी तरह की समस्या इस मिशन में भी देखी गई थी। इसमें भी तीसरा चरण काम नहीं कर पाया था, जिसके परिणामस्वरूप सरकार की रणनीतिक जरूरतों के लिए बनाया गया ईओएस-09 सैटेलाइट नष्ट हो गया था। रिपोर्ट के अनुसार, आमतौर पर तकनीकी समितियां यह पता लगाती हैं कि कौन सा पुर्जा खराब हुआ, लेकिन यह नई समिति मैन्युफैक्चरिंग, खरीद और रॉकेट के विभिन्न घटकों को असेंबल करने की प्रक्रियाओं की भी गहराई से जांच करेगी। भारत के अंतरिक्ष इकोसिस्टम में अब कई निजी कंपनियां भी शामिल हैं। इसलिए, समिति इस बात की भी समीक्षा करेगी कि क्या जवाबदेही तय करने के लिए कोई उचित प्रक्रिया मौजूद है और इसमें कैसे सुधार किया जा सकता है। समिति के सदस्य (जो इसरो के बाहर के विशेषज्ञ हैं) अप्रैल से पहले वर्तमान इसरो अध्यक्ष वी. नारायणन को अपनी रिपोर्ट पेश करने वाले है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत के अंतरिक्ष आयोग के सदस्य और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एनएसए डोभाल ने 3 फरवरी को विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र का दौरा किया था, जो संभवतः पीएसएलवी-सी62 मिशन की विफलता से ही जुड़ा था। बात दें कि 18 मई (पीएसएलवी-सी61) की दुर्घटना की एफएसी रिपोर्ट पीएसएलवी-सी62 के प्रक्षेपण से पहले प्रधानमंत्री कार्यालय को भेज दी गई थी, लेकिन इसके विवरण गुप्त रखे गए हैं। केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया किया कि इसरो के भीतर विश्लेषण करने की पूरी विशेषज्ञता है, लेकिन इस बार जनता और स्टेकहोल्डर्स का विश्वास बनाए रखने के लिए तीसरे पक्ष का मूल्यांकन किया जा रहा है। इसरो समस्या को पूरी तरह से ठीक करने के बाद जून में अपने अगले प्रक्षेपण की महत्वाकांक्षी योजना बना रहा है। इस वर्ष 18 प्रक्षेपण निर्धारित हैं, जिनमें से 6 में निजी क्षेत्र के सैटेलाइट शामिल हैं। इसके अलावा विदेशी लांच अगले साल जापान, अमेरिका और फ्रांस के 3 बड़े विदेशी सैटेलाइट भी लांच होने हैं। आशीष दुबे / 24 फरवरी 2026