राष्ट्रीय
25-Feb-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। भगवान शिव को अर्पित किया जाने वाला बेल का फल सिर्फ स्वादिष्ट ही नहीं, बल्कि औषधीय गुणों से भरपूर एक प्राकृतिक उपचार भी है। भारतीय परंपरा में बेल को केवल एक साधारण फल न मानकर अध्यात्म और आयुर्वेद का संगम माना गया है। गर्मियों में शरीर को शीतल रखने और पाचन सुधारने में इसका उपयोग सदियों से किया जाता रहा है। आयुर्वेदिक ग्रंथों में बेल को दीपन, पाचन, बल्य और ग्रहणी-नाशक के रूप में वर्णित किया गया है। फल ही नहीं, बेल के पत्ते, छाल और जड़ का भी विशिष्ट महत्व है। बेल का रस शरीर की सूजन दूर करने में मददगार माना जाता है। इसमें मौजूद प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट और एंटीमाइक्रोबियल गुण सूजन को कम करते हैं और शरीर को हल्का व ऊर्जावान महसूस कराते हैं। पाचन संबंधी समस्याओं में भी बेल अत्यंत लाभकारी है। कब्ज, पेट में जलन, अल्सर या अपच जैसी परेशानियों में बेल का सेवन आंतों को साफ कर आराम पहुंचाता है। जिन्हें बेल का रस पसंद नहीं, वे बाजार में उपलब्ध बेल के चूर्ण का सेवन कर सकते हैं, जिससे दस्त और कब्ज दोनों में राहत मिलती है। बेल ब्लड शुगर नियंत्रण में भी सहायक माना जाता है। बेल के पत्तों का अर्क ग्लूकोज मेटाबॉलिज्म को समर्थन देता है, जिससे रक्त शर्करा का स्तर नियंत्रित रहता है। हालांकि इसका सेवन करने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना आवश्यक है, विशेषकर उन लोगों के लिए जो मधुमेह की दवाइयाँ ले रहे हों। बेल के रस का सेवन करने के लिए इसके गूदे को पानी में मसलकर छान लें और स्वादानुसार मिश्री मिलाएं। इसे सुबह या शाम, दोनों समय लिया जा सकता है। लेकिन शुगर के मरीज, गर्भवती महिलाएं और किसी भी पुरानी बीमारी से ग्रस्त व्यक्ति बेल या इसके पत्तों के अर्क का सेवन करने से पहले डॉक्टर की राय अवश्य लें। गर्मियों में शरीर को गर्मी से बचाने, पाचन सुधारने और समग्र स्वास्थ्य बेहतर करने में बेल एक प्राकृतिक, सुरक्षित और सुलभ उपाय है। बता दें कि मार्च के शुरू होने में भले ही कुछ दिन बाकी हों, लेकिन दोपहर की गर्माहट पहले ही बढ़ने लगी है। आने वाले दिनों में तापमान चरम पर होगा और शरीर में वात-पित्त संतुलन बिगड़ने से लोग ठंडे पेय की ओर रुख करेंगे। सुदामा/ईएमएस 25 फरवरी 2026