राष्ट्रीय
25-Feb-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। शरीर में लचीलापन बढ़ाने और तनाव कम करने में पादहस्तासन या प्रसारित पादोत्तानासन बेहद लाभकारी माना जाता है। योगाचार्यों के अनुसार, पैरों को चौड़ा फैलाकर आगे की ओर झुकने वाला यह आसन शरीर की कई मांसपेशियों में गहरा खिंचाव पैदा करता है और मन को शांत करता है। योग विशेषज्ञों का कहना है कि इस आसन का नियमित अभ्यास शरीर की लचक बढ़ाता है, तनाव घटाता है और सम्पूर्ण स्वास्थ्य में सुधार लाता है। योगाचार्यों के अनुसार, प्रसारित पादहस्तासन की शुरुआत योग मैट पर ताड़ासन की मुद्रा में सीधे खड़े होकर की जाती है। दोनों पैरों को जोड़कर, हाथों को शरीर के साथ रखें। अब गहरी सांस लेते हुए पैरों को लगभग 3 से 4 फीट (या अपनी लंबाई के अनुसार 4–5 फीट) तक फैलाएं। पैरों को समानांतर रखते हुए एड़ियों को बाहर और अंगूठों को हल्का अंदर की ओर रखें। हाथों को कमर पर रखते हुए छाती को उभरा हुआ रखें। इसके बाद सांस छोड़ते हुए कमर से आगे की ओर झुकें और पोज होल्ड करें। फिर सांस भीतर लेते हुए धीरे-धीरे वापस खड़े हो जाएं। इस आसन के कई शारीरिक लाभ बताए गए हैं। यह जांघों, कूल्हों और पीठ की मांसपेशियों में गहरा खिंचाव देकर लचीलापन बढ़ाता है। रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है, जिससे पीठ दर्द में राहत मिल सकती है। यह पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है, कब्ज दूर करता है और पेट की मांसपेशियों को सक्रिय करता है। आसन के दौरान सिर नीचे होने से मस्तिष्क में रक्त प्रवाह सुधरता है, जिससे तनाव और चिंता में कमी आती है। पैर, टखने और कोर मसल्स भी मजबूत होते हैं, थकान कम होती है और मन अधिक शांत होता है। हालांकि अभ्यास के दौरान सावधानी बरतना भी जरूरी है। जिन लोगों को पीठ में गंभीर चोट, हाई या लो ब्लड प्रेशर, ग्लूकोमा, घुटने या कूल्हे की समस्या है, उन्हें यह आसन बिना विशेषज्ञ की सलाह के नहीं करना चाहिए। गर्भवती महिलाओं को भी इससे परहेज या विशेषज्ञ की देखरेख की आवश्यकता होती है। सुदामा/ईएमएस 25 फरवरी 2026