25-Feb-2026
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वॉशिंगटन,(ईएमएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका ने भारतीय सौर ऊर्जा क्षेत्र को एक बड़ा झटका देते हुए भारत से आयात होने वाले सोलर पैनलों पर 126 प्रतिशत का भारी शुरुआती टैरिफ लगाने का निर्णय लिया है। अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने इस कड़े कदम के पीछे तर्क दिया है कि भारत सरकार अपने घरेलू निर्माताओं को अनुचित तरीके से सब्सिडी और आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है। अमेरिका का मानना है कि इस सहायता के कारण भारतीय कंपनियां अमेरिकी बाजार में बेहद सस्ते उत्पाद बेच रही हैं, जिससे वहां की स्थानीय कंपनियों को भारी प्रतिस्पर्धा और आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। भारत के साथ-साथ अमेरिका ने इंडोनेशिया पर 86 प्रतिशत से 143 प्रतिशत और लाओस पर 81 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का प्रस्ताव भी रखा है। महत्वपूर्ण बात यह है कि यह विशेष टैरिफ उन सामान्य वैश्विक टैरिफ से बिल्कुल अलग है, जिन्हें हाल ही में अमेरिकी अदालत ने खारिज कर दिया था। यह कार्रवाई अमेरिकी सोलर निर्माताओं के एक समूह की शिकायत और जांच की मांग के बाद की गई है। इस संवेदनशील मामले में अंतिम फैसला 6 जुलाई तक आने की उम्मीद है। यदि यह शुल्क स्थाई होता है, तो यह वैश्विक सौर ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को पूरी तरह से बदल सकता है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों में पहले से ही खींचतान चल रही है। एक दिन पहले ही केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने संकेत दिए थे कि जैसे ही टैरिफ के मोर्चे पर स्थिति स्पष्ट होगी, भारत व्यापार वार्ता फिर से शुरू करेगा। हालांकि, मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए 22 फरवरी को वाशिंगटन में होने वाली मुख्य वार्ताकारों की बैठक को पहले ही स्थगित कर दिया गया है। इस बैठक में एक अंतरिम व्यापार समझौते के मसौदे को अंतिम रूप दिया जाना था, लेकिन अब इस पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, भारत अन्य देशों के साथ अपने व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने में जुटा है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की 26 फरवरी की भारत यात्रा के संदर्भ में पीयूष गोयल ने उम्मीद जताई है कि इस सप्ताह के अंत तक भारत और कनाडा के बीच मुक्त व्यापार समझौते के लिए संदर्भ की शर्तों को अंतिम रूप दे दिया जाएगा। अमेरिका के साथ उपजे इस गतिरोध के बीच भारत की नजर अब वैकल्पिक बाजारों और रणनीतिक वार्ताओं पर टिकी है। अमेरिकी बाजार में टिके रहना लगभग नामुमकिन इस फैसले का भारतीय सौर कंपनियों पर गहरा असर पड़ने की संभावना है, क्योंकि उनके लिए अब अमेरिकी बाजार में टिके रहना लगभग नामुमकिन हो जाएगा। आंकड़ों के अनुसार, साल 2024 में भारत ने अमेरिका को लगभग 792.6 मिलियन डॉलर (करीब 6,500 करोड़ रुपये) के सोलर उत्पादों का निर्यात किया था, जो 2022 की तुलना में नौ गुना अधिक है। इस तीव्र वृद्धि पर अब ब्रेक लग सकता है। दूसरी ओर, अमेरिका के भीतर भी इसके प्रतिकूल प्रभाव देखने को मिल सकते हैं, क्योंकि वहां सोलर प्रोजेक्ट लगाने वाली कंपनियों और आम उपभोक्ताओं के लिए लागत में भारी बढ़ोतरी होगी। विशेष रूप से 2025 की पहली छमाही में अमेरिका पहुंचने वाले कुल सोलर मॉड्यूल का 57 प्रतिशत हिस्सा भारत, इंडोनेशिया और लाओस से ही आया था, जो इस क्षेत्र में इन देशों की पकड़ को दर्शाता है। वीरेंद्र/ईएमएस/25फरवरी2026 -----------------------------------