वॉशिंगटन(ईएमएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने हालिया स्टेट ऑफ द यूनियन संबोधन में व्यापारिक शुल्कों (टैरिफ) और न्यायपालिका के हस्तक्षेप को लेकर अत्यंत कड़ा रुख अपनाया है। राष्ट्रपति ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले की तीखी आलोचना की है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम के तहत लागू की गई आयात शुल्क व्यवस्था को अवैध घोषित कर दिया गया था। अदालत ने 6-3 के बहुमत से दिए गए अपने निर्णय में स्पष्ट किया था कि राष्ट्रपति ने इस मामले में अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन किया है और इस तरह के शुल्कों के लिए अमेरिकी संसद कांग्रेस की मंजूरी अनिवार्य होनी चाहिए थी। अदालत के इस दुर्भाग्यपूर्ण हस्तक्षेप पर असंतोष व्यक्त करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि जो देश दशकों से अमेरिका का आर्थिक शोषण कर रहे थे, वे अब अरबों डॉलर का भुगतान कर रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी नीतियों के कारण अमेरिका को बड़ा राजस्व मिल रहा है और इसके बावजूद व्यापारिक साझेदार देश समझौतों से खुश हैं। ट्रंप ने अपनी आर्थिक सूझबूझ की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने अर्थव्यवस्था का जो आकलन किया, उसमें 22 नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री भी गलत साबित हुए। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल में बिना किसी महंगाई के जबरदस्त विकास देखा गया, जो विशेषज्ञों की भविष्यवाणियों के बिल्कुल विपरीत था। सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रेड पॉलिसी को रद्द किए जाने के मात्र 24 घंटे के भीतर राष्ट्रपति ने और भी कड़ा कदम उठाते हुए वैश्विक टैरिफ दरों में भारी बढ़ोतरी कर दी। उन्होंने सभी देशों से आयात होने वाले सामानों पर ग्लोबल टैरिफ को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर तत्काल प्रभाव से 15 प्रतिशत करने की घोषणा की। 21 फरवरी को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस फैसले की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के रूप में उनके पास नए सौदे करने की जो कानूनी शक्तियां हैं, वे विदेशी देशों के लिए और भी अधिक नुकसानदेह साबित हो सकती हैं। यही कारण है कि अधिकांश देश और कंपनियां पुराने सफल समझौतों को ही जारी रखना चाहती हैं, जिसे सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने प्रभावित करने की कोशिश की थी। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि कई देश बिना किसी दंड के वर्षों से अमेरिका को लूट रहे थे, जिसे उन्होंने राष्ट्रपति बनने के बाद रोका। उन्होंने इस बात पर भी संतोष व्यक्त किया कि कानूनी चुनौतियों के बावजूद अंतरराष्ट्रीय व्यापार जगत उनके द्वारा तय किए गए रास्ते पर चलने के लिए तैयार है। राष्ट्रपति का यह बयान संकेत देता है कि आने वाले समय में वे अपनी अमेरिका फर्स्ट की नीति और व्यापारिक प्रतिबंधों को लेकर और भी आक्रामक रुख अपना सकते हैं, भले ही उन्हें घरेलू स्तर पर कानूनी बाधाओं का सामना करना पड़े। वीरेंद्र/ईएमएस/25फरवरी2026 -----------------------------------