नई दिल्ली (ईएमएस)। प्राचीन योग क्रिया जलनेति नाक के मार्गों की गहरी सफाई करती है और श्वसन तंत्र को मजबूत बनाती है। तेजी से बढ़ते प्रदूषण और साइनस की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए यह क्रिया बेहद लाभदायक बताई है। इस बारे में योगाचार्यों का कहना है कि इसका नियमित अभ्यास न केवल सांस लेने में आसानी प्रदान करता है, बल्कि मानसिक स्पष्टता और एकाग्रता भी बढ़ाता है। प्रदूषित वातावरण में रहने वाले लोगों को इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए। आयुष मंत्रालय के अनुसार, जलनेति योग की महत्वपूर्ण शुद्धिकरण क्रिया (षट्कर्म) है। इसमें गुनगुने नमक मिले पानी से नासिकाओं की सफाई की जाती है, जिससे धूल, प्रदूषण, एलर्जी कारक और बैक्टीरिया आसानी से बाहर निकल जाते हैं। यह प्रक्रिया सामान्य सर्दी-जुकाम, साइनसाइटिस, नाक बंद रहने और छींक जैसी समस्याओं को कम करने में बेहद सहायक मानी जाती है। लगातार अभ्यास से ऊपरी श्वसन संक्रमण और दमा जैसी समस्याओं में भी राहत मिल सकती है। एक्सपर्ट जलनेति करने की सही विधि बताते हैं। इसके लिए पहले कागासन की मुद्रा में बैठें और पैरों के बीच थोड़ी दूरी रखें। आगे झुकते हुए सिर को सक्रिय नासिका (जिससे सांस सहज आ रही हो) के विपरीत दिशा में हल्का मोड़ें। इसके बाद नेति पॉट की टोंटी को सक्रिय नासिका में लगाकर मुंह हल्का खोलें और केवल मुंह से सांस लेते रहें। अब धीरे-धीरे गुनगुना नमक मिला पानी नाक से अंदर डालें, जो दूसरी नासिका से बाहर निकलता है। आधा पात्र पूरा होने पर नाक साफ करें और यही प्रक्रिया दूसरी ओर दोहराएं। अंत में कपालभाति करें, ताकि नाक में बचा पानी पूरी तरह निकल जाए। विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि जलनेति करते समय सावधानी बेहद जरूरी है। पानी हल्का गुनगुना होना चाहिए और नमक की मात्रा उचित रखनी चाहिए एक लीटर पानी में लगभग आधा चम्मच नमक। पहली बार यह क्रिया किसी प्रशिक्षित विशेषज्ञ की निगरानी में ही करना बेहतर रहता है। नियमित जलनेति से नाक की शुद्धि, बेहतर श्वसन, साइनस की समस्या में राहत, सिरदर्द में कमी, माइग्रेन में सुधार और मानसिक तनाव में कमी जैसे अनेक लाभ मिलते हैं। सुदामा/ईएमएस 26 फरवरी 2026