नई दिल्ली (ईएमएस)। दांतों की सड़न अक्सर बिना किसी प्रारंभिक संकेत के धीरे-धीरे दांतों को कमजोर करती जाती है। कई मामलों में सड़न इतनी बढ़ जाती है कि पूरा दांत संक्रमित हो जाता है और इलाज मुश्किल हो जाता है। इसलिए दांतों की सुरक्षा और समय-समय पर जांच बेहद जरूरी मानी जाती है। बाहर से चमकदार दिखाई देने वाले दांतों के भीतर कब साइलेंट तरीके से छेद बनने लगते हैं, इसका पता तब चलता है जब दर्द असहनीय हो चुका होता है। विशेषज्ञों के अनुसार दांतों में सड़न की प्रक्रिया धीमी होने के कारण इसके लक्षण लंबे समय तक दिखाई नहीं देते। जब दर्द या संवेदनशीलता महसूस होती है, तब तक सड़न काफी हद तक फैल चुकी होती है। सड़न के कई कारण होते हैं अत्यधिक मीठा भोजन, ब्रश या कुल्ला सही तरीके से न करना, मुंह की लार की कमी, विटामिन डी और कैल्शियम की कमी, तथा रात में बिना ब्रश किए सो जाना। ये सभी कारण दांतों में बैक्टीरिया की वृद्धि को बढ़ावा देते हैं और सड़न का जोखिम बढ़ाते हैं। आयुर्वेद में दांतों की सड़न से बचाव और मसूड़ों को मजबूत करने के लिए कई प्रभावी घरेलू नुस्खे बताए गए हैं। इनमें सबसे पहला है लौंग के तेल का उपयोग। लौंग के तेल में प्रबल एंटीबैक्टीरियल और दर्द निवारक गुण होते हैं। रात में सोने से पहले इसे दांतों पर लगाने से बैक्टीरिया कम होते हैं और दर्द में राहत मिलती है। दूसरा उपाय है नीम से दातुन करना या नीम के पानी से कुल्ला करना। नीम प्राकृतिक रूप से एंटीबैक्टीरियल होता है और दांतों में जमा संक्रमण को कम करता है। तीसरी सलाह है नारियल तेल से ऑयल पुलिंग। यह मुंह के कोनों तक पहुंचकर गंदगी और पीलेपन को हटाने में मदद करती है। पांच मिनट तक तेल को मुंह में घुमाकर थूक दें और फिर कुल्ला कर लें। चौथा उपाय नमक और सरसों के तेल का मिश्रण है, जिसे हफ्ते में दो से तीन बार दांतों पर लगाने से दर्द कम होता है और बैक्टीरिया नष्ट होते हैं। यह मिश्रण दांतों की पीली परत को हटाने में भी मददगार होता है। इन नुस्खों के साथ-साथ आहार में सुधार भी जरूरी है। भोजन में कैल्शियम और विटामिन डी शामिल करने से दांत मजबूत होते हैं, जबकि विटामिन सी खट्टे फलों से मिलता है जो मसूड़ों को स्वस्थ रखने में मदद करता है। सुदामा/ईएमएस 26 फरवरी 2026