वॉशिंगटन(ईएमएस)। ईरान के खिलाफ इजरायल और अमेरिका द्वारा शुरू किए गए बड़े सैन्य ऑपरेशन ने वैश्विक राजनीति में खलबली मचा दी है। दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ ट्रंप आठ युद्धों को रुकवाने और भारत-पाकिस्तान जैसे देशों के बीच संघर्ष विराम का दावा करते हैं, वहीं दूसरी तरफ वे एक साथ कई मोर्चों पर सैन्य कार्रवाइयों के आदेश भी दे रहे हैं। ईरान के साथ मौजूदा तनाव के बीच ट्रंप ने संकेत दिया है कि वे उनके परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने के लिए एक कड़ा समझौता चाहते हैं। वैश्विक विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की यह नई रणनीति पूरी दुनिया में अपनी धाक जमाने और संभावित शत्रुओं के मन में भय पैदा करने की एक सुविचारित योजना का हिस्सा है। राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका अब एक ऐसी आक्रामक विदेश नीति पर चल रहा है, जिसने न केवल मध्य पूर्व बल्कि लैटिन अमेरिका और अफ्रीका तक के समीकरण बदल दिए हैं। शनिवार को ईरान पर हुए भीषण हमलों के बाद ट्रंप ने ईरानी जनता से सीधा संवाद करते हुए आह्वान किया कि वे अपने भाग्य की बागडोर अपने हाथ में लें और 1979 से चले आ रहे इस्लामी शासन के खिलाफ विद्रोह करें। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिकी युद्धपोत पहले ही क्षेत्र में तैनात किए जा चुके थे और ईरान के भीतर भी सरकार के खिलाफ असंतोष चरम पर था।ट्रंप प्रशासन की यह कार्रवाई केवल ईरान तक सीमित नहीं है। इससे पहले अमेरिका ने ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व के तहत वेनेजुएला में प्रवेश कर तत्कालीन राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर लिया था। इस साहसिक ऑपरेशन की प्रशंसा करते हुए ट्रंप ने कहा कि दुनिया ने अमेरिका की पूर्ण सैन्य शक्ति देख ली है और अब दुश्मनों को हमसे डरना चाहिए। इसके अतिरिक्त, लैटिन अमेरिका और कैरिबियन में नशीली दवाओं की तस्करी रोकने के नाम पर अमेरिकी सेना ने संदिग्ध जहाजों पर कम से कम 45 हमले किए हैं, जिनमें 150 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। आतंकवाद के खिलाफ अभियान में भी अमेरिका ने अपनी पकड़ मजबूत की है। मार्च 2025 में इराक के अल-अनबार प्रांत में एक सटीक हवाई हमले के दौरान आईएसआईएल के नंबर-2 कमांडर अब्दुल्ला अबू खदीजा को मार गिराया गया। वहीं दिसंबर 2025 में सीरिया के पालिमारा में दो अमेरिकी सैनिकों की शहादत का बदला लेते हुए ट्रंप ने आतंकी ठिकानों पर भारी बमबारी के आदेश दिए थे। यमन में भी रेड सी (लाल सागर) से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हुती विद्रोहियों के बुनियादी ढांचे पर दर्जनों नौसैनिक और हवाई हमले किए गए, जिससे विद्रोही समूह को भारी वित्तीय और सामरिक नुकसान पहुंचा है। अफ्रीकी महाद्वीप में सोमालिया और नाइजीरिया भी अमेरिकी सैन्य रडार पर हैं। सोमालिया में अल-शबाब और आईएसआईएल की क्षेत्रीय शाखाओं को कुचलने के लिए हवाई हमलों में रिकॉर्ड बढ़ोत्तरी की गई है। वहीं नाइजीरिया में 100 से अधिक अमेरिकी सैन्य कर्मियों को स्थानीय सेना के प्रशिक्षण के लिए तैनात किया गया है। ट्रंप ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि नाइजीरियाई सरकार ईसाइयों के कथित नरसंहार को रोकने में विफल रही, तो अमेरिका वहां सीधे हवाई हमले करने से पीछे नहीं हटेगा। वीरेंद्र/ईएमएस/01मार्च2026