राष्ट्रीय
05-Mar-2026
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राष्ट्रपति स्टब 5 से 7 मार्च तक भारत की आधिकारिक यात्रा पर नई दिल्ली (ईएमएस)। भारत और फिनलैंड के बीच बढ़ते कूटनीतिक संबंधों की दिशा में नया अध्याय जुड़ गया है। गुरुवार को भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर और फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब की हालिया मुलाकात ने दोनों देशों के बीच भविष्य की साझेदारी की ठोस रूपरेखा तैयार की है। यह बैठक राष्ट्रपति स्टब और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच होने वाली उच्च-स्तरीय वार्ता की प्रस्तावना के रूप में देखी जा रही है। विदेश मंत्री जयशंकर ने मुलाकात को सुखद बताकर विश्वास व्यक्त किया कि राष्ट्रपति का यह दौरा भारत और फिनलैंड के द्विपक्षीय संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा। बात दें कि राष्ट्रपति स्टब 5 से 7 मार्च तक भारत की आधिकारिक यात्रा पर हैं। पदभार ग्रहण करने के बाद यह उनका पहला भारत दौरा है, जो नई दिल्ली के लिए उनके रणनीतिक महत्व को दिखाता है। इस यात्रा का एक मुख्य आकर्षण रायसीना डायलॉग का 11वां संस्करण है, जिसमें राष्ट्रपति स्टब मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हो रहे हैं। वैश्विक मंच पर फिनलैंड की आवाज और उनके संबोधन को लेकर भारतीय कूटनीतिक हलकों में काफी उत्साह है। इसके पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति स्टब का गर्मजोशी से स्वागत किया और उनके सम्मान में दोपहर के भोजन की मेजबानी की। दोनों नेताओं के बीच हुई वैश्विक मंचों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों में एक-दूसरे का समर्थन करना। वर्तमान भू-राजनीतिक चुनौतियों और साझा चिंताओं पर विचारों का आदान-प्रदान। जयशंकर ने कहा कि दोनों देशों के रिश्ते साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और कानून के शासन की मजबूती पर टिके हैं। राष्ट्रपति स्टब की यात्रा केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है। वे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन से भी शिष्टाचार भेंट करेंगे। इसके पश्चात, वे देश की आर्थिक राजधानी मुंबई का रुख करेंगे। मुंबई में उनके कार्यक्रमों का स्वरूप अधिक व्यावसायिक और शैक्षिक होगा: वे महाराष्ट्र के राज्यपाल और मुख्यमंत्री के साथ बैठक करेंगे और भारत-फिनलैंड बिजनेस इवेंट में शिरकत करेंगे। उनके साथ आए उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल में फिनलैंड के प्रमुख बिजनेस लीडर शामिल हैं, जो भारत में निवेश की संभावनाएं तलाश रहे हैं। मुंबई यूनिवर्सिटी में छात्रों को संबोधित करना उनके दौरे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो दोनों देशों के बीच पीपल-टू-पीपल कनेक्ट को बढ़ावा देगा। यूरोपीय संघ (ईयू) और विशेष रूप से नॉर्डिक क्षेत्र में फिनलैंड, भारत का एक अपरिहार्य सहयोगी है। तकनीकी नवाचार, हरित ऊर्जा और शिक्षा के क्षेत्र में फिनलैंड की विशेषज्ञता भारत के विकसित भारत एटदरेट 2047 के लक्ष्य में सहायक सिद्ध हो सकती है। आशीष दुबे / 05 मार्च 2026