नई दिल्ली (ईएमएस)। कैग की 2024 की रिपोर्ट ने 2016-2023 के दौरान दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में दवाओं की गुणवत्ता और नियंत्रण पर गंभीर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट में अनिवार्य परीक्षण की कमी, खराब भंडारण और अप्रभावी रिकॉल प्रक्रिया का उल्लेख है। (कैग)-2024 की रिपोर्ट में वर्ष 2016 से 2023 के दौरान दिल्ली सरकार के अस्पतालों में वितरित की जा रही दवाओं की गुणवत्ता और गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार दवाओं की गुणवत्ता और रखरखाव प्रभावित होने की स्थितियों के बावजूद उन्हें समय पर वापस लेने (रिकाॅल) और वितरण पर रोक लगाने की प्रक्रिया प्रभावी नहीं रही। यह भी पाया गया कि सभी दवाओं का अनिवार्य गुणवत्ता परीक्षण सुनिश्चित नहीं किया गया। कैग रिपोर्ट से स्पष्ट है कि इस अवधि में दिल्ली की स्वास्थ्य व्यवस्था में संसाधन, गुणवत्ता नियंत्रण और निगरानी तीनों स्तर पर गंभीर खामियां बनी हुई थीं। स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) वर्ष 2016 से 2023 के दौरान प्राथमिक स्वास्थ्य ढांचे के लिए आवंटित 35.16 करोड़ में से केवल 9.78 करोड़ (28 प्रतिशत) ही खर्च कर सका, जो योजना निर्माण और क्रियान्वयन में सरकार की कमजोरी को दर्शाता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि इस अवधि में आम आदमी मोहल्ला क्लीनिक (एएएमसी) योजना भी लक्ष्य से पीछे रही। 1000 क्लीनिक के लक्ष्य के मुकाबले मार्च 2023 तक केवल 523 क्लीनिक ही स्थापित किए जा सके। मोबाइल स्वास्थ्य योजना और स्कूल स्वास्थ्य योजना भी अपेक्षित लक्ष्य हासिल नहीं कर सकीं। लगभग 17 लाख स्कूली बच्चों में से 3.51 लाख तक ही स्वास्थ्य सेवाएं पहुंच सकीं। इसके अलावा 150 पालीक्लिनिक स्थापित करने की योजना में से 2018-19 तक केवल 28 ही चालू हो सके। डिस्पेंसरी में डाक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और पैरामेडिकल कर्मियों की भारी कमी भी दर्ज की गई। अजीत झा /देवेन्द्र/नई दिल्ली/ईएमएस/24/मार्च/2026