देश में हर साल कीटनाशकों के उपयोग से होती 7500 किसानों की मौत नई दिल्ली,(ईएमएस)। देश में खेती को सुरक्षित बनाने के लिए केंद्र की मोदी सरकार लंबे समय से लागू 1968 के कीटनाशक कानून में बदलाव करने की तैयारी में है। इसके स्थान पर नया कीटनाशक प्रबंधन विधेयक लाया जाएगा, इस बिल को कैबिनेट की मंजूरी के बाद संसद में पेश किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य खेती में इस्तेमाल होने वाले खतरनाक रसायनों पर नियंत्रण बढ़ाना और किसानों की जान की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। रिपोर्टों के अनुसार, देश में कीटनाशकों का उपयोग तेजी से बढ़ा है, लेकिन इस कीटनाशक से खतरे भी बढ़ रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक हर साल करीब 7500 किसान जहरीले रसायनों के कारण अपनी जान गंवा रहे हैं। इसके अलावा, खाने-पीने की चीजों में इन रसायनों का असर देखा जा रहा है, जो आम लोगों की सेहत के लिए भी खतरा है। इसके बाद सरकार ने पुराने कानून में बदलाव कर सख्त नियम लागू करने का फैसला किया। नए कानून में तकनीक का भी खास उपयोग होगा। इसके तहत सभी कीटनाशकों को डिजिटल सिस्टम में दर्ज करना अनिवार्य होगा। देश में निर्मित और आयातित सभी पेस्टीसाइड्स को सरकार के डैशबोर्ड पर रजिस्टर करना पड़ेगा, जिससे यह पता लगाया जा सके कि कौन सा कीटनाशक किस राज्य में पहुंचा और कहां इस्तेमाल हो रहा है। किसानों को सुरक्षित खेती के लिए प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। उन्हें दवा छिड़कने के सही तरीके, सुरक्षा उपकरणों के उपयोग और मानक उत्पादों की जानकारी दी जाएगी। रिटेलर्स के लिए भी नियम तय किए जाएंगे ताकि वे केवल प्रमाणित उत्पाद ही बिक्र के लिए उपलब्ध रहे। नए कानून में सजा और जुर्माने के प्रावधान काफी सख्त किए गए है। खतरनाक या गैर-मानक कीटनाशक बनाने या बेचने पर 5 साल तक जेल और 40 लाख रुपये तक का जुर्माना होगा। यदि किसी कीटनाशक के उपयोग से मौत होती है, तब दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। बार-बार नियम तोड़ने पर जुर्माना बढ़ाया जाएगा और तीसरी बार उल्लंघन पर कंपनी का लाइसेंस रद्द होगा। छोटे नियमों के उल्लंघन पर भी सजा होगी। गैर-रजिस्टर्ड या एक्सपायर उत्पाद बेचने पर 50 हजार से 2 लाख रुपये का जुर्माना होगा। बिना लाइसेंस उत्पादन या आयात करने पर 3 साल तक की सजा और भारी जुर्माना लगाया जाएगा। निगरानी और पारदर्शिता पर जोर देकर नए कानून के तहत पैकेजिंग, लेबलिंग और परिवहन की सतत निगरानी होगी। एक राष्ट्रीय स्तर की रजिस्ट्री और दिशानिर्देश तय करने के लिए बोर्ड भी बनाया जाएगा। कानून लागू होने के बाद केवल सुरक्षित और प्रमाणित कीटनाशकों के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा और किसानों की सुरक्षा बेहतर होगी। इस तरह, 57 साल बाद भारत का कीटनाशक कानून आधुनिक तकनीक और सख्त नियमों के साथ किसानों और आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। आशीष दुबे / 25 मार्च 2026