राज्य
25-Mar-2026
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कार्यक्रम में दिव्यांग बच्चों की प्रस्तुति की मुख्यमंत्री जी ने की सराहना, 5 लाख रुपए देने की घोषणा कैफे कल्चर हाउस मध्य प्रदेश पर्यटन का एक अनूठा प्रोजेक्ट- मुख्यमंत्री प्रकृति, संस्कृति और विभिन्न प्रकार के विशेष भोजन का संयोजन है MPT कैफ़े भोपाल (ईएमएस)। प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने जन्मदिवस के अवसर पर आज रविंद्र भवन परिसर में एमपीटी कल्चर हाउस का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने विशेष रूप से दिव्यांग बच्चों के साथ केक काटकर जन्मदिवस मनाया तथा उन्हें उपहार वितरित कर स्नेह व्यक्त किया। इस अवसर पर बाल निकेतन एवं अरुषि एनजीओ के बच्चों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों की मुख्यमंत्री ने सराहना की। “राम सा संघर्ष” कविता प्रस्तुत करने के लिए सिहायना को 21 हजार की प्रोत्साहन राशि दी।उन्होंने इन संस्थाओं के बच्चों के उत्साहवर्धन हेतु 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करने की घोषणा की। साथ ही प्रतिभा को प्रोत्साहित करने के लिए हर संभव सहायता करने का वादा किया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि एमपीटी कल्चर हाउस प्रदेश की सांस्कृतिक समृद्धि और पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह स्थान कला, संस्कृति और स्थानीय परंपराओं को प्रोत्साहित करने का एक सशक्त मंच बनेगा।कैफे कल्चर हाउस मध्य प्रदेश पर्यटन का एक अनूठा प्रोजेक्ट है। जिसमें प्रकृति, संस्कृति और विभिन्न प्रकार के विशेष भोजन का संयोजन है। इस प्रकार की पहल न केवल पर्यटन को बढ़ावा देती हैं, बल्कि स्थानीय व्यंजनों और संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इस अवसर पर मुख्य रूप से प्रदेश के माननीय पर्यटन, संस्कृति और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी भी उपस्थित रहे।साथ ही मध्य प्रदेश सरकार पर्यटन विभाग के सचिव एवं मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक डॉ. इलैयराजा टी,अपर प्रबंध संचालक डॉ. अभय अरविंद बेडेकर, वरिष्ठ अधिकारी, गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों ने इस पहल की सराहना की और इसे प्रदेश के सांस्कृतिक एवं पर्यटन विकास के लिए एक सकारात्मक कदम बताया। रविंद्र भवन परिसर में, शहर की भागदौड़ और ट्रैफिक के बीच स्थित एमपीटी कैफे इस कल्चर हाउस का विशेष आकर्षण है। लगभग 85 लोगों की बैठने की क्षमता वाला यह कैफे आगंतुकों को शांत और सुकून भरा वातावरण प्रदान करता है। यहां का मेन्यू प्रदेश की समृद्ध क्षेत्रीय व्यंजनों की झलक प्रस्तुत करता है, जिसमें भुट्टे का कीस, रागी बालूशा और कोदो अरंचिनी जैसे पारंपरिक एवं नवाचारी व्यंजन शामिल हैं। एमपीटी कैफे: स्वाद और शांति का अनूठा संगम कैफ़े कल्चर हाउस शहर की तेज़ रफ्तार के बीच एक ठहराव की तरह है, जो स्थानीय समुदाय की आत्मा को सुकून देने के लिए एक लैंडस्केप-आधारित कैफ़े के रूप में डिज़ाइन किया गया है। हरी-भरी हरियाली और प्राकृतिक बनावटों को आधुनिक वास्तुशिल्प ढाँचे में समाहित करते हुए, यह कैफ़े आसपास के सांस्कृतिक केंद्र में आने-जाने वालों के लिए एक “लिविंग रूम” जैसा अनुभव प्रदान करता है, जहाँ एक साधारण कॉफी ब्रेक प्रकृति के बीच एक गहन और सजीव पाक अनुभव में बदल जाता है। यह स्थान स्थानीय कारीगरों के साथ गहरे सहयोग के माध्यम से विकसित हुआ है, जहाँ पारंपरिक शिल्पकला को एक समकालीन आश्रय में पिरोया गया है। इस कैफे को टॉप ट्रेंड नेचर ग्रीन थीम पर डिजाइन किया गया है, जिससे यहां आने वाले लोगों को नेचर के बीच बैठकर ऑथेंटिक फ्लेवर्स का अनुभव मिलेगा। एमपीटी बेक हाउस का आउटलेट भी रहेगा उपलब्ध कैफे कल्चर हाउस में एमपीटी बेक हाउस का आउटलेट भी रहेगा, जहां होममेड ब्रेड, पेस्ट्री, पफ्स और बेकरी आइटम्स उपलब्ध होंगे। । इस स्थान की आत्मा स्थानीय विरासत और शिल्पकला के प्रति गहरी प्रतिबद्धता में निहित है। बाहरी प्रेरणाओं की ओर देखने के बजाय, डिज़ाइन टीम ने भीतर की ओर देखा और स्थानीय कारीगरों के एक समूह के साथ मिलकर इस पूरे वातावरण को हाथों से गढ़ा। हाथ से तराशी गई लकड़ी की बैठकों से लेकर विशेष रूप से तैयार टेराकोटा, बांस और जूट के कलात्मक कार्य तक—हर तत्व हमारे शहर के सृजनकर्ताओं की पहचान को दर्शाता है। ये सहयोग इस बात को सुनिश्चित करते हैं कि कैफ़े केवल एक व्यावसायिक स्थल न रहकर क्षेत्रीय प्रतिभा का एक जीवंत प्रदर्शन बने, जहाँ प्रयुक्त सामग्री—पत्थर, लकड़ी, जूट और मिट्टी—उस प्राकृतिक परिदृश्य की गूँज बनती है जिसने कभी इस क्षेत्र की पहचान तय की थी। लगभग 85 लोगों की बैठने की क्षमता वाला यह कैफे आगंतुकों को शांत और सुकून भरा वातावरण प्रदान करता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस प्रकार की पहलें न केवल पर्यटन को बढ़ावा देती हैं, बल्कि स्थानीय व्यंजनों और संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इस कैफे की सबसे बड़ी विशेषता इसका फ्यूजन मेन्यू है, जो मध्य प्रदेश के पारंपरिक स्वादों को आधुनिक अंदाज में परोसता है: पारंपरिक जायका: यहाँ आने वाले अतिथि इंदौर के प्रसिद्ध भुट्टे का कीस और बुंदेलखंडी तथा मालवा के अन्य क्षेत्रीय स्वादों का आनंद ले सकते हैं। मिलेट्स (श्री अन्न) को बढ़ावा: स्वास्थ्य और परंपरा को जोड़ते हुए मेन्यू में कोदो अरंचिनी और रागी बालूशाही जैसे नवाचारी व्यंजन शामिल किए गए हैं। यह पहल प्रदेश के मोटे अनाज (Millets) को लोकप्रिय बनाने के सरकारी संकल्प को भी दर्शाती है। कलात्मक परिवेश: कैफे का इंटीरियर प्रदेश की हस्तशिल्प और कलाकृतियों से सुसज्जित है, जो भोजन के अनुभव को और भी यादगार बना देता है। यहाँ का वातावरण लेखकों, कलाकारों और शांति चाहने वाले पर्यटकों के लिए एक क्रिएटिव हब के रूप में विकसित किया गया है।