राज्य
03-Apr-2026
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समय की गणना जीएमटी के स्थान पर एमएसटी से ! उज्जैन (ईएमएस) । केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के साथ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को शहर के तारामंडल में 3 दिवसीय महाकाल द मास्टर्स ऑफ टाइम अंतराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ किया। इस दौरान उज्जैन में 15.20 करोड़ की लागत से बने विज्ञान केंद्र का लोकार्पण किया गया। दोनों नेताओं ने विद्यार्थी विज्ञान मंथन 2026-27 की वेबसाइट का भी शुभारंभ किया। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि महाकाल हमारी परंपरा में कालगणना के केंद्र बिंदु हैं, जहां भारत और मध्य प्रदेश सरकार मिलकर अंतराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित कर रही है। महाकाल द मास्टर ऑफ टाइम से महाकाल स्टैंडर्ड टाइम तक जाना, इस विमर्श का उद्देश्य है। भारत को विकसित करना है तो भारत की वैज्ञानिक ताकत को बढ़ाना पड़ेगा। भारत की ज्ञान-विज्ञान परंपरा को जन-जन तक पहुंचाना उद्देश्य है। स्कूली बच्चों को उज्जैन के इस विज्ञान केंद्र के माध्यम से जोड़ा जाना चाहिए। तीन दिवसीय इस आयोजन में प्राचीन ज्ञान और आधुनिक विज्ञान पर मंथन होगा। इसमें देश-विदेश के वैज्ञानिक एवं विद्वान सम्मिलित हो रहे हैं। केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि उज्जैन वह स्थान है, जहां मध्य रेखा और कर्क रेखा का केंद्र बिंदु मिलता है। यहीं से प्राचीन काल मे कालगणना होती थी। इसलिए समय आ गया है कि हम ग्रीनविच मीन टाइम की जगह महाकाल स्टैंडर्ड टाइम की तार्किक स्थापना करें। उज्जैन एक ऐसा स्थान जहां विज्ञान और अध्यात्म के बीच की दूरी खत्म होती है। चाहे काशी हो, कांची हो या पुरी धाम। ये सभी भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित ऐसी जीती-जागती प्रयोगशालाएं हैं, जहां विज्ञान, कला, संस्कृति, साहित्य और आध्यात्मिकता का अद्भुत समन्वय मिलता है। उज्जैन में विज्ञान केंद्र की स्थापना मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि उज्जैन ज्ञान विज्ञान की नगरी बने, समय अनुसार इसका रेखांकन हो, इसके प्रयास जारी हैं। अब उज्जैन में विज्ञान केंद्र की स्थापना हो गई है। प्राचीन विज्ञान की दृष्टि से वराहमिहिर से लेकर आर्यभट्ट तक अतीत के काल में उज्जैन का जो महत्व था, आधुनिक काल मे भी ऐसा ही महत्व होगा। उज्जैन धर्म की नगरी होने के साथ विज्ञान की भी नगरी है। सिंहस्थ 2028 में आने वाले श्रद्धालु काल गणना के केन्द्र उज्जैन का वैज्ञानिक महत्व भी जानेंगे। उज्जैन में खगोलीय गणनाओं की सटीकता मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने कहा कि उज्जैन और डोंगला के आधार पर होने वाली खगोलीय गणनाओं की सटीकता अद्भुत है। डोंगला को एस्ट्रोनोमिकल स्टडीज के लिए विकसित किया जा रहा है। इस दिशा में उज्जैन का यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन मील का पत्थर होगा। भूमध्य रेखा और कर्क रेखा का कटाव या केंद्र बिंदु पहले उज्जैन में था, जो अब उज्जैन से डोंगला में शिफ्ट हो गया है। यहां 21 जून को सूर्य की छाया शून्य हो जाती है। ग्रीनविच के मीन टाइम में रात को 10 बजे तक सूर्य के दर्शन होते हैं। यह केंद्र बिंदु कैसे हो सकता है।