-2030 तक नवीकरणीय स्रोतों से अपनी 50 प्रतिशत बिजली की जरूरतों को पूरा करने का लक्ष्य भोपाल (ईएमएस)। मप्र सरकार ने 2030 तक वार्षिक बिजली खपत का 50 प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा संसाधनों से प्राप्त करने का लक्ष्य रखा है। वित्तीय वर्ष 2027 और 2030 तक क्रमश: नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के माध्यम से वार्षिक बिजली खपत का 30 प्रतिशत और 50 प्रतिशत पूरा करना है। राज्य स्तरीय सरकारी विभागों द्वारा क्रमश: 2027 और 2030 तक हरित ऊर्जा अनुपालन का 50 प्रतिशत और 100 प्रतिशत हासिल करना है। लेकिन विडंबना यह है कि आज की स्थिति में प्रदेश की बिजली वितरण कंपनियां नवीकरणीय ऊर्जा के कुल लक्ष्य को तो हासिल करने की स्थिति में हैं, लेकिन अलग-अलग स्रोतों में बड़ा असंतुलन सामने आया है। केवल सौर ऊर्जा (सोलर) में प्रदर्शन अपेक्षा से कहीं बेहतर है। जबकि विंड और हाइड्रो एनर्जी में स्थिति चिंताजनक है। मप्र आज हरित ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसको देखते हुए सरकार ने 2030 तक वार्षिक बिजली खपत का 50 प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा संसाधनों से प्राप्त करने का लक्ष्य रखा है। लेकिन विडंबना यह है कि प्रदेश की बिजली वितरण कंपनियां पवन (विंड) और जल (हाइड्रो) ऊर्जा के मामले में कंपनियां तय लक्ष्य का आधा भी पूरा नहीं कर पाई हैं, जबकि सौर ऊर्जा (सोलर) में प्रदर्शन अपेक्षा से कहीं बेहतर है। वहीं मप्र विद्युत विनियामक आयोग ने बिजली कंपनियों के लिए ग्रीन एनर्जी का टारगेट साल 2029-30 तक के लिए तय कर दिया है। इसके तहत ग्रीन एनर्जी की हिस्सेदारी को 43.33 प्रतिशत तक बढ़ाना है। केंद्र सरकार की नई व्यवस्था के तहत रिन्यूएबल परचेज ऑब्लिगेशन (आरपीओ) को एक साथ लागू किया गया है, जिसमें बिजली कंपनियों को अपनी कुल खपत का तय हिस्सा सौर, पवन, जल और अन्य नवीकरणीय स्रोतों से लेना अनिवार्य है। सोलर पर अधिक ध्यान वर्ष 2026-27 के लिए प्रदेश की कुल 96,315 मिलियन यूनिट बिजली खपत को आधार मानकर लक्ष्य तय किया गया है। आंकड़ों के अनुसार पवन ऊर्जा में 1,897 मिलियन यूनिट (एमयू) के लक्ष्य के मुकाबले केवल 890 एमयू उपलब्ध होने का अनुमान है, यानी करीब 53 फीसदी की कमी। इसी तरह जल विद्युत में 1,291 एमयू के लक्ष्य के मुकाबले मात्र 300 एमयू उपलब्ध है, जो लगभग 77 फीसदी की कमी दर्शाता है। इस कमी की मुख्य वजह यह है कि नई नीति के तहत केवल 31 मार्च 2024 के बाद शुरू हुए प्रोजेक्ट्स की बिजली को ही गणना में शामिल किया जा रहा है, जबकि ऐसे नए प्रोजेक्ट्स की संख्या सीमित है। इसके उलट सोलर एनर्जी में कंपनियां लक्ष्य से काफी आगे चल रही हैं। 2,601 एमयू के लक्ष्य के मुकाबले 4,014 एमयू बिजली उपलब्ध रहने का अनुमान है, जो 154 फीसदी उपलब्धि है। रूफटॉप सोलर जैसे स्रोत इसमें अहम भूमिका निभा रहे हैं। अन्य नवीकरणीय स्रोत भी 28,837 एमयू के लक्ष्य के मुकाबले 30,275 एमयू उपलब्धता (करीब 105 फीसदी) दर्ज की गई है। अतिरिक्त नवीकरणीय ऊर्जा खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी सरकार ने बिजली कंपनियों के लिए ग्रीन एनर्जी का जो टारगेट दिया है उसके अनुसार, 2024-25 में 29.91 प्रतिशत, 2025-26 में 33.01 प्रतिशत, 2026-27 में 35.95 प्रतिशत, 2027-28 में 38.81 प्रतिशत, 2028-29 में 41.36 प्रतिशत और 2029-30 में 43.33 प्रतिशत है। आयोग ने नियमों के तहत सोलर और अन्य स्रोतों में उपलब्ध अतिरिक्त ऊर्जा को पवन और जल विद्युत की कमी के साथ समायोजित कर दिया है। इस प्रावधान के कारण कुल मिलाकर नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य पूरा माना जाएगा। इस समायोजन के बाद वर्ष 2026-27 के लिए अतिरिक्त नवीकरणीय ऊर्जा खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसका सीधा असर यह होगा कि बिजली कंपनियों पर अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं आएगा और उपभोक्ताओं को भी बढ़ी हुई दरों का सामना नहीं करना पड़ेगा। यह स्थिति ऊर्जा क्षेत्र के लिए मिश्रित संकेत देती है। जहां सोलर सेक्टर तेजी से आगे बढ़ रहा है, वहीं पवन और जल विद्युत परियोजनाओं में निवेश और विस्तार की जरूरत साफ नजर आ रही है। संतुलित ऊर्जा मिश्रण के लिए आने वाले समय में इन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देना होगा। कुल मिलाकर आयोग का फैसला उपभोक्ताओं के हित में है, लेकिन दीर्घकालिक ऊर्जा संतुलन के लिए विंड और हाइड्रो सेक्टर में तेजी लाना जरूरी होगा। विनोद / 06 अप्रैल 26