08-Apr-2026
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कानपुर(ईएमएस)। शहर के बहुचर्चित किडनी ट्रांसप्लांट कांड में एक चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है। जिस आयुष चौधरी को अब तक इस पूरे मामले में मुख्य पीड़ित और मजबूर किडनी डोनर के तौर पर देखा जा रहा था, अब वही पुलिस की गहन जांच के दायरे में आ गया है। आयुष द्वारा किए गए दावों और उसकी संदिग्ध पृष्ठभूमि ने पुलिस को अपनी जांच की दिशा बदलने पर मजबूर कर दिया है। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आयुष वाकई में एक शिकार है या फिर इस पूरे खेल का कोई अहम मोहरा। जांच के दौरान पुलिस को आयुष के बारे में ऐसी कई जानकारियां मिली हैं, जिनसे यह संदेह गहरा गया है कि उसने अपनी पहचान और व्यक्तिगत इतिहास को लेकर पुलिस को गुमराह किया है। शुरुआती जांच में आयुष ने खुद को उत्तराखंड का छात्र बताया था, लेकिन अब पुलिस को उसके बिहार से जुड़े होने के पुख्ता सुराग मिले हैं। बताया जा रहा है कि वह मूल रूप से बिहार का निवासी है। इसके अलावा, जांच एजेंसियां अब आयुष के संभावित साइबर फ्रॉड कनेक्शनों को भी खंगाल रही हैं। पुलिस यह समझने की कोशिश कर रही है कि क्या वह सिर्फ एक मजबूर डोनर था या इस अवैध नेटवर्क के पीछे उसकी भूमिका कुछ और थी। कानपुर पुलिस के हाथ आयुष से जुड़े करीब 16 दोस्तों की एक सूची लगी है, जिनके मोबाइल रिकॉर्ड्स, आर्थिक लेनदेन और आपसी संबंधों की विस्तृत जांच की जा रही है। जांच का दायरा केवल उत्तराखंड और बिहार तक ही सीमित नहीं है; सूत्रों के अनुसार, उत्तर प्रदेश पुलिस अब गुजरात पुलिस से भी संपर्क साधने की तैयारी में है। शक है कि आयुष के तार किसी बड़े अंतरराज्यीय साइबर या आर्थिक अपराध नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं। इन दोस्तों और संपर्कों से पूछताछ के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि इस किडनी कांड की जड़ें कितनी गहरी हैं। फिलहाल, पुलिस इस पूरे मामले पर आधिकारिक तौर पर कुछ भी बोलने से बच रही है, लेकिन जांच की तीव्रता ने यह संकेत दे दिए हैं कि आने वाले दिनों में बड़े खुलासे हो सकते हैं। किडनी ट्रांसप्लांट का यह मामला अब केवल अस्पतालों, डॉक्टरों और बिचौलियों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अब इस केस का सबसे प्रमुख चेहरा आयुष स्वयं सवालों के घेरे में है। यदि आयुष के खिलाफ मिल रहे सुराग सही साबित होते हैं, तो यह मामला सिर्फ एक अवैध अंग प्रत्यारोपण का केस न रहकर एक संगठित बड़े आपराधिक सिंडिकेट की कहानी बन जाएगा। वीरेंद्र/ईएमएस/08अप्रैल2026