08-Apr-2026
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- कई बड़े अधिकारी और नेता के नापने की जताई जा रही संभावना कोरबा (ईएमएस) सार्वजनिक क्षेत्र के वृहद उपक्रम कोल् इंडिया की अनुसांगिक कंपनी एसईसीएल बिलासपुर के अधीन कोरबा-पश्चिम क्षेत्र में स्थापित एवं संचालित खुले मुहाने की गेवरा कोयला परियोजना अंतर्गत एसईसीएल की मेगा परियोजना गेवरा-दीपका परियोजना से प्रभावित ग्राम मलगांव की जमीनों के मुआवजा और बड़े पैमाने पर गलत तरीके से मुआवजा हड़पने तथा फर्जीवाड़ा करने के मामले में सीबीआई की टीम ने एक बार फिर कोरबा में दस्तक दी है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार सीबीआई की टीम में शामिल एक डीएसपी सहित अन्य अधिकारियों ने गेवरा हाउस में तीन दिन से से अपनी कार्यवाही कर रही हैं। पूर्व में इस मामले के अंतर्गत करोड़ों का फर्जी मुआवजा बिना कोई संपत्ति होते हुए भी जारी करवाने के मामले में सीबीआई ने श्रमिक नेता एक के विरुद्ध अपराध पंजीब्द्ध कर लेने की पुष्टि की जा रही हैं, लेकिन इसके बाद की कार्यवाही अभी लंबित बताई जा रही हैं। अभी 3 दिन से कोयलांचल में हलचल पुनः तेज हुई है। जानकारी के अनुसार सीबीआई के अधिकारियों ने उन ग्रामीणों को प्रमुखता से तलब किया है जिनके नाम 152 लोगों की उस सूची में है जिन्हें अन्य कारण से अपात्र बताकर इनका मुआवजा रद्द कर दिया गया है और इन्हें मुआवजा के लिए अपात्र माना गया। इन प्रभावित ग्रामीणों ने आरोप लगाते हुए जानकारी दी की वे ही लोग वास्तविक हकदार हैं और गांव के पुराने बाशिंदे हैं, लेकिन सांठगांठ पूर्वक तथा कुछ जमीन दलालों और फर्जी मुआवजा प्रकरण बनाने/बनवाने वालों से मिलीभगत करके इन्हें नुकसान पहुंचाने के लिए यह सारा खेल खेला गया। बहरहाल, एक बार फिर सीबीआई की दस्तक दिए जाने से भू-विस्थापितों की आड़ में किए गए मुआवजा घोटाला के मामले में सरगर्मी बढ़ गई है। बताया जा रहा हैं की इस मामले में प्रशासन के एक बाबू परिवार की भूमिका शुरू से संदेह के दायरे में रही है। आरोप हैं की तत्कालीन अधिकारियों से मिलीभगत करके इसके परिवार के लोगों के नाम से पांच अलग-अलग फर्जी मुआवजा पत्रक बनवाए गए थे जिनमें सत्यापनकर्ता अधिकारियों के हस्ताक्षर भी सील सहित दर्ज थे। मामला उजागर होने के बाद आनन-फानन में उक्त फर्जी पत्रकों को निरस्त कर दिया गया और कोई मुआवजा प्रकरण उनके परिवार के नाम से नहीं बनाया गया। माना जा रहा हैं की अब चूंकि सारी जांच-पड़ताल सीबीआई के द्वारा की जा रही है तो निगाहें इस ओर है कि संबंधितों की विरुद्ध एफआईआर कब तक दर्ज होगी और संबंधित अपराधी कब तक सलाखों के पीछे भेजे जाएंगे….? सूत्रों के मुताबिक सीबीआई के द्वारा मुआवजा पत्रक बनाने वालों से लेकर तत्कालीन राजस्व-एसईसीएल अधिकारियों, तहसीलदारों से लेकर ग्राम कोटवार, भू-विस्थापितों के भी बयान दर्ज किये जा रहे हैं। जो उपस्थित नहीं हैं, उन्हें नोटिस देकर बुलाया जा रहा है। बयानों को कलमबंद करने के साथ ही मौका मुआयना भी किया जाकर संभवत: जमीनों की नापजोख भी कराई जा सकती है। कुल मिलाकर सीबीआई की जांच आगे बढ़ने से फर्जीवाड़ा में शामिल लोगों में खलबली मच गई है। फर्जीवाड़ा के विरुद्ध लड़ाई लड़ रहे लोगों में न्याय की उम्मीद जागी है। 08 अप्रैल / मित्तल