नई दिल्ली (ईएमएस)। भागदौड भरी जिंदगी में तनाव बढ़ना और एकाग्रता में कमी जैसी समस्याएं आम होती जा रही हैं। ऐसे में योग की ओर लोगों का रुझान बढ़ता जा रहा है। योग की ‘शांभवी मुद्रा’ एक सरल और प्रभावी उपाय के रूप में सामने आई है। यह मुद्रा न केवल मन को शांत करती है बल्कि ध्यान केंद्रित करने की क्षमता को भी बढ़ाती है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, शांभवी मुद्रा एक प्राचीन योगिक तकनीक है, जिसमें साधक अपनी आंखों की पुतलियों को भौंहों के बीच स्थित केंद्र पर स्थिर करने का प्रयास करता है। इस स्थान को योग में ‘तीसरा नेत्र’ भी कहा जाता है। इस अभ्यास का उद्देश्य मन को एकाग्र करना और आंतरिक शांति प्राप्त करना होता है। नियमित अभ्यास से मानसिक स्पष्टता बढ़ती है और व्यक्ति अपने विचारों पर बेहतर नियंत्रण कर पाता है। मान्यता है कि इस मुद्रा के अभ्यास से शरीर में ऊर्जा का प्रवाह संतुलित रहता है, जो मूलाधार चक्र से ऊपर उठकर आज्ञा चक्र तक पहुंचता है। यह प्रक्रिया शरीर और मन के बीच संतुलन स्थापित करने में सहायक मानी जाती है। इसके अलावा, शांभवी मुद्रा तनाव हार्मोन कोर्टिसोल के स्तर को कम करने में मदद करती है और मस्तिष्क स्वास्थ्य से जुड़े एक महत्वपूर्ण तत्व बीडीएनएफ को बढ़ावा देती है, जिससे मानसिक क्षमता और स्मरण शक्ति में सुधार होता है। इस मुद्रा को करना काफी सरल है। इसे करने के लिए किसी शांत स्थान पर सुखासन, सिद्धासन या कुर्सी पर सीधी पीठ के साथ बैठें। हाथों को घुटनों पर ज्ञान मुद्रा में रखें, जिसमें अंगूठा और तर्जनी उंगली आपस में मिलती हैं। आंखें खुली रखते हुए दृष्टि को भौंहों के बीच केंद्रित करें और सांस को सामान्य बनाए रखें। इस दौरान मन को भटकने न दें और धीरे-धीरे ध्यान बनाए रखने का प्रयास करें। शुरुआत में इसे प्रतिदिन 5 से 10 मिनट तक किया जा सकता है, जिसे धीरे-धीरे बढ़ाकर 20 से 21 मिनट तक किया जा सकता है। हालांकि, शुरुआत में अभ्यास धीरे और सावधानी से करना चाहिए। यदि आंखों में तनाव महसूस हो तो अभ्यास रोक देना चाहिए। सुदामा/ईएमएस 09 अप्रैल 2026