नई दिल्ली,(ईएमएस)। भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक रिश्तों की एक नई पटकथा वॉशिंगटन डीसी में लिखी गई है। भारत के उप-राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार विक्रम मिस्री और अमेरिकी सीनेटर मार्को रुबियो की मुलाकात ने दुनिया को यह संकेत दे दिया है कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अब बड़ा खेला होने वाला है। इस बैठक में न केवल रक्षा सहयोग को बढ़ाने पर चर्चा हुई, बल्कि क्रिटिकल मिनरल्स की सप्लाई चेन को चीन के चंगुल से छुड़ाने के लिए एक ठोस रणनीति तैयार की गई है। इस मुलाकात में ट्रंप के करीबी सर्जियो गोर की मौजूदगी ने इसे और भी महत्वपूर्ण बना दिया है। सबसे बड़ी खबर यह है कि मार्को रुबियो अगले महीने भारत के दौरे पर आ रहे हैं। उन्हें डोनाल्ड ट्रंप का सबसे भरोसेमंद रणनीतिकार माना जाता है। उनकी इस यात्रा का मुख्य एजेंडा चीन के बढ़ते दबदबे को रोकना और भारत-अमेरिका के बीच रक्षा सौदों को अंतिम रूप देना है। वायु सेना प्रमुख एयर मार्शल एपी सिंह का भी हालिया अमेरिका दौरा इसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है। दोनों देश अब सिर्फ कागजी पार्टनर नहीं रहना चाहते, बल्कि वे रक्षा प्रणालियों के संयुक्त उत्पादन और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की ओर बढ़ रहे हैं। इस पूरी मुलाकात का केंद्र बिंदु क्रिटिकल मिनरल्स यानी गैलियम, लिथियम और रेयर अर्थ जैसे खनिज हैं। भविष्य की मिसाइलों और सेमीकंडक्टरों के लिए ये खनिज ऑक्सीजन की तरह हैं, जिन पर फिलहाल चीन का कब्जा है। भारत और अमेरिका मिलकर एक वैकल्पिक सप्लाई चेन बनाने पर सहमत हुए हैं ताकि चीन के कूटनीतिक ब्लैकमेल से बचा जा सके। मार्को रुबियो का आगामी भारत दौरा इन रणनीतिक चर्चाओं को जमीन पर उतारने का काम करेगा, जिससे पूरे दक्षिण एशिया का रक्षा समीकरण बदलने वाला है। वीरेंद्र/ईएमएस/10अप्रैल2026