नई दिल्ली,(ईएमएस)। लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने वाले नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लागू करने और परिसीमन (डिलिमिटेशन) की प्रक्रिया को लेकर देश में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। इन महत्वपूर्ण विषयों पर निर्णायक चर्चा और संवैधानिक प्रावधानों को पारित करने के उद्देश्य से गुरुवार से संसद का एक विशेष सत्र शुरू होने जा रहा है। यह सत्र 16 से 18 अप्रैल तक चलेगा, जिसमें सरकार का मुख्य एजेंडा महिला आरक्षण और सीटों के पुनर्गठन से जुड़े विधेयकों को मंजूरी दिलाना है। प्रस्तावित बदलावों के तहत लोकसभा में सदस्यों की कुल संख्या बढ़ाकर 850 की जाएगी, जिनमें से 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। यह कदम भारतीय लोकतांत्रिक ढांचे में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक ऐतिहासिक मोड़ माना जा रहा है। हालांकि, परिसीमन के मसले पर विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच मतभेद और विवाद की स्थिति भी बनी हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार ने विपक्ष से इन ऐतिहासिक सुधारों के पक्ष में एकजुट होने और समर्थन देने की लगातार अपील की है। सरकार की कोशिश है कि इस तीन दिवसीय सत्र के दौरान सभी संवैधानिक प्रक्रियाओं को सुचारू रूप से पूरा कर लिया जाए, ताकि देश की विधायी संस्थाओं में दूरगामी बदलावों का मार्ग प्रशस्त हो सके। वीरेंद्र/ईएमएस/15अप्रैल2026