-जटिल और लंबे समय से चले आ रहे विवाद का समाधान एक ही बैठक में संभव नहीं इस्लामाबाद,(ईएमएस)। अमेरिका-ईरान के बीच जारी तनाव के बीच फिर शांति वार्ता शुरू कराने की कोशिशें तेज हो गई हैं। पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ इसमें सक्रिय भूमिका निभाते हुए इस सप्ताह सऊदी अरब और तुर्किये के दौरे पर जा रहे हैं। उनका उद्देश्य मध्यस्थ देशों के साथ बातचीत कर अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की बातचीत को आगे बढ़ाना है। पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने एक बयान में कहा कि पीएम शहबाज शरीफ ने उन्हें इस पहल की जानकारी दी है। उन्होंने शहबाज शरीफ और अन्य अधिकारियों से अपील की है कि वे अमेरिका, ईरान और अन्य प्रमुख देशों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखें, ताकि शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके। रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका-ईरान के बीच हाल ही में 21 घंटे तक चली बातचीत बेनतीजा रही थी। पाकिस्तान के इस्लामाबाद में हुई इस बैठक में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान के संसदीय अध्यक्ष मोहम्मद बाकर कालिबाफ शामिल हुए थे, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका। हालांकि, अब नए सिरे से बातचीत की उम्मीदें बढ़ गई हैं। ट्रंप ने संकेत दिया है कि आने वाले दो दिनों में फिर से बातचीत शुरू हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि इस बार बातचीत पाकिस्तान में ही होने की संभावना ज्यादा है। ट्रंप ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की तारीफ करते हुए उनकी भूमिका को अहम बताया। सूत्रों के मुताबिक अमेरिका और ईरान दोनों ही नए दौर की बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन इसकी तारीख, स्थान और प्रतिनिधिमंडल की संरचना अभी तय नहीं हुई है। इस्लामाबाद और जिनेवा को संभावित मेजबान शहरों के तौर पर देखा जा रहा है। इस बीच संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने उम्मीद जताई है कि युद्धविराम वार्ता फिर से शुरू हो सकती है। उन्होंने कहा कि इतने जटिल और लंबे समय से चले आ रहे विवाद का समाधान एक ही बैठक में संभव नहीं है, इसलिए लगातार बातचीत और युद्धविराम बनाए रखना जरूरी है। बता दें अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह का युद्धविराम लागू है, जिसने हालात को कुछ हद तक शांत कर दिया है, लेकिन इस दौरान अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकेबंदी कर दी है, वहीं ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण कड़ा कर दिया है, जिससे वैश्विक तेल कीमतों में भारी उछाल देखा गया। रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा स्थिति में सबसे अहम बात यह है कि दोनों देशों के बीच संवाद के रास्ते खुले हैं और युद्धविराम कायम है। यही कारण है कि मध्यस्थ देशों को उम्मीद है कि जल्द ही दोनों पक्ष फिर से बातचीत की मेज पर लौट सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह वार्ता दोबारा शुरू होती है, तो यह न सिर्फ क्षेत्रीय तनाव कम करने में मदद करेगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर आर्थिक स्थिरता के लिए भी अहम साबित हो सकती है। फिलहाल सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या पाकिस्तान की मध्यस्थता अमेरिका और ईरान के बीच जमी बर्फ को पिघला पाएगी या नहीं। सिराज/ईएमएस 15अप्रैल26