मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में पशुपालन के क्षेत्र में एक नया अध्याय शुरू हुआ है। प्रदेश की मोहन सरकार ने पशुओं की रक्षा, संरक्षण और संवर्धन को न केवल धार्मिक-सांस्कृतिक दृष्टि से बल्कि आर्थिक विकास और किसानों की आय वृद्धि के प्रमुख साधन के रूप में अपनाया है। गौ-संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए उन्होंने पशुपालन विभाग का नाम बदलकर ‘गौपालन, पशुपालन एवं दुग्ध विकास विभाग’ कर दिया, जो उनकी दूरदर्शी सोच को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ‘स्वावलंबी गौशाला (कामधेनु) स्थापना नीति-2025’ लागू की है। इसके तहत राज्य में 5,000 से अधिक गायों वाली बड़ी आत्मनिर्भर गौशालाएं स्थापित करने की बड़ी कार्ययोजना तैयार की गई है। इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन और सागर जैसी जगहों पर आदर्श गौशालाओं का निर्माण प्रगति पर चल रहा है। घायल या निराश्रित गायों को ले जाने के लिए हाइड्रोलिक कैटल लिफ्टिंग वाहनों की व्यवस्था की गई है। ग्वालियर में देश का पहला 100 टन क्षमता वाला सीएनजी प्लांट भी गौशाला में स्थापित किया गया है, जो गोबर से ऊर्जा उत्पादन का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है। सरकार ने शासकीय गौशालाओं में प्रति गाय अनुदान राशि बढ़ाई है और पशुधन रखने वालों को प्रोत्साहन देने के लिए विभिन्न योजनाएं शुरू की हैं। 25 से अधिक देशी गायें पालने वाले पशुपालकों को 10 लाख रुपये तक का अनुदान देने की घोषणा भी की गई है। मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव का स्पष्ट संकल्प है कि मध्यप्रदेश को देश की ‘मिल्क कैपिटल’ बनाया जाए। इसके लिए दुग्ध समृद्धि अभियान और कृषक कल्याण वर्ष 2026 के अंतर्गत पशुपालन को विशेष महत्व देने की विशेष पहल शुरू हुई है। 2026 के बजट में किसानों को दुधारू पशु उपलब्ध कराने, नस्ल सुधार, पोषण और स्वास्थ्य प्रबंधन पर जोर दिया जा रहा है मुख्यमंत्री दुधारू पशु योजना, कामधेनु निवास योजना और मुख्यमंत्री डेयरी प्लस कार्यक्रम जैसी योजनाओं से पशुपालक आत्मनिर्भर बन रहे हैं। बैगा, सहरिया जैसी आदिवासी समुदायों को भी इन योजनाओं का लाभ मिल रहा है। मुख्यमंत्री डेयरी प्लस कार्यक्रम को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में सीहोर, विदिशा और रायसेन जिलों में संचालित किया जा रहा है। एमपी की मोहन सरकार ने गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए न केवल अपने बजट में अनुदान बढ़ाया है बल्कि पशुओं की नस्ल सुधार पर विशेष जोर दिया है। प्रदेश में “स्वावलंबी गौशालाओं की स्थापना नीति-2025” लागू की गई है। इसके अंतर्गत नगरीय क्षेत्रों में उपलब्ध गोवंश के आश्रय और भरण-पोषण के लिए 5 हजार से अधिक क्षमता वाली वृहद गौशालाएं स्थापित की जा रही हैं। प्रदेश के आगर मालवा, इंदौर, ग्वालियर और उज्जैन जिलों में आदर्श गौशालाएं स्थापित की जा चुकी हैं, जबकि भोपाल, जबलपुर और सागर में इनके निर्माण कार्य प्रगति पर हैं। सरकार ने पशु चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार किया है। पशुओं के रोग नियंत्रण, ईयर टैगिंग और मुफ्त टीकाकरण पर विशेष जोर दिया जा रहा है, साथ ही फसल अवशेषों को गौशालाओं में उपयोग करने, बायोगैस प्लांट और खाद बनाने को बढ़ावा दिया जा रहा है जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ पशुओं का भी बेहतर पोषण हो रहा है। किसान कल्याण वर्ष 2026 के तहत पशुपालन को बढ़ावा देने के साथ ही पशु स्वास्थ्य, टीकाकरण और नस्ल सुधार के लिए प्रदेश में अनेक कार्यक्रम संचालित किये जा रहे हैं। प्रदेश में दुग्ध उत्पादन और संग्रहण को बढ़ाने के लिए व्यापक योजना बनाई गई है। डॉ. भीमराव आंबेडकर कामधेनु योजना पर 25 या अधिक दुधारू गाय/ भैंस पालने पर 25 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है। बैगा, सहरिया आदि जनजातियों के लिए 90 फीसदी अनुदान पर दो पशु दिए जाते हैं। बीते वर्ष 1000 से अधिक गौशालाओं का संचालन प्रदेश के भीतर हुआ है। निराश्रय गौवंश को आश्रय देने की कार्ययोजना पर काम किया जा रहा है। प्रदेश में गौसंवर्धन बोर्ड के माध्यम से गौशालाओं को चारा-भूसा अनुदान के लिए 505 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री दुधारू पशु योजना, कामधेनु निवास योजना, मुख्यमंत्री डेयरी प्लस कार्यक्रम और नस्ल सुधार के कार्यक्रमों से पशुओं का जीवन संवर रहा है। एमपी का देश के दुग्ध उत्पादन में 9 फीसदी योगदान है जिसे 20 फीसदी करने का लक्ष्य है। दुग्ध संकलन क्षमता को बढ़ाते हुए 50 लाख लीटर प्रतिदिन तक दुग्ध संग्रहण का लक्ष्य रखा गया है। आगामी 5 वर्षों में दूध संकलन कवरेज वाले गांवों की संख्या 9 हजार से बढ़ाकर 26 हजार करने का लक्ष्य है। अब तक प्रदेश में 1,181 नई दुग्ध सहकारी समितियों का गठन किया जा चुका है और 617 निष्क्रिय समितियों को पुनः सक्रिय बनाया गया है। इसमें लगभग 150 बहुउद्देशीय सहकारी समितियों का गठन भी शामिल है। दुग्ध उत्पादन और ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा हर ब्लॉक में एक वृंदावन ग्राम विकसित किया जा रहा है। गौ-संरक्षण और गौ- संवर्धन मोहन सरकार की इस समय सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है। डॉ. मोहन यादव ने गोवर्धन पूजा जैसे अवसरों पर भी पशु कल्याण को अपना बड़ा मिशन बनाया है जिसके तहत बड़े मंचों से सरकार की अनेक योजनाओं को आम जनता के बीच पहुंचाया है। उन्होंने पशुपालन को किसानों की अतिरिक्त आय का स्रोत बनाने का संकल्प लिया है जिससे आने वाले दिनों में मध्यप्रदेश के किसान पूरी तरह से आत्मनिर्भर हो सकेंगे। मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में किसानों को पशुपालन के लिए प्रेरित कर विभिन्न योजनाओं के माध्यम से पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा दे रही है। पशुपालन के माध्यम से किसानों की आय बढ़ेगी और वे आत्मनिर्भर होंगे। डॉ. मोहन यादव का संकल्प है वर्ष 2028 तक एमपी को देश की मिल्क कैपिटल बनाएंगे। डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में पशु कल्याण सांस्कृतिक विरासत, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का एक समग्र दृष्टिकोण बन गया है। गौपालन को बढ़ावा देकर, आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराकर और पशुपालकों को आर्थिक सहयोग देकर सरकार किसानों की आय बढ़ाने के साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के प्रयास कर रही है। सरकार का लक्ष्य पशुपालन को लाभ का सौदा बनाने के साथ ही गौपालकों की आय बढ़ाना और गौवंश की रक्षा करना है। मध्यप्रदेश गौ-वंश के वध पर कानूनी रूप से पूर्ण प्रतिबंध लगाने वाला देश का पहला राज्य है। प्रदेश सरकार ने प्रदेश में गौ-हत्या कानून को पहले से अधिक मजबूत किया गया है। सरकार द्वारा गौ -वंश के अवैध परिवहन के खिलाफ प्रदेश भर में विशेष धरपकड़ अभियान भी संचालित किये जा रहे हैं। (लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं ) (यह लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं इससे संपादक का सहमत होना अनिवार्य नहीं है) .../ 16 अप्रैल /2026