शिमला,(ईएमएस)। देश की सबसे पुरानी कांग्रेस पार्टी खुद की मजबूती के लिए विचार मंथन कर रही है। गुरुवार को शिमला में हिमाचल प्रदेश में नई कार्यकारिणी के गठन के बाद प्रदेश कांग्रेस इकाई की पहली महत्वपूर्ण आम सभा पार्टी मुख्यालय, राजीव भवन में आयोजित की गई। प्रदेशाध्यक्ष विनय कुमार की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में पार्टी के आगामी रोडमैप और आंतरिक चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा हुई। इसी बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री आनंद शर्मा को लेकर अटकलें शुरु हो गईं। पार्टी के भीतर चल रही खींचतान और वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा की नाराजगी की अटकलों पर हिमाचल की प्रदेश कांग्रेस प्रभारी रजनी पाटिल ने विराम लगाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि शिमला में आनंद शर्मा से उनकी मुलाकात हुई है और पार्टी छोड़ने जैसी चर्चाओं में कोई सच्चाई नहीं है। पाटिल ने स्वीकार किया कि राज्यसभा टिकट न मिलने या अन्य कारणों से काम करने वाले नेताओं में स्वाभाविक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन पार्टी सभी को साथ लेकर चलेगी। गौरतलब है कि आनंद शर्मा द्वारा हाल ही में विदेश नीति पर केंद्र के रुख की सराहना किए जाने के बाद उनके अगले कदम को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज थीं। वरिष्ठ नेता कौल सिंह ठाकुर ने भी इस दौरान वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी का मुद्दा उठाया। बैठक में प्रदेश प्रभारी रजनी पाटिल, कैबिनेट मंत्री प्रो. चंद्र कुमार, सह-प्रभारी विधित चौधरी और संगठन महासचिव विनोद जिंटा सहित कार्यकारिणी के सदस्य और सभी जिला अध्यक्ष उपस्थित रहे। बैठक से पूर्व पत्रकारों से बातचीत में रजनी पाटिल ने स्पष्ट किया कि संगठन का पुनर्गठन लंबे समय बाद हुआ है, और अब मुख्य फोकस जिला व जमीनी स्तर पर सक्रियता बढ़ाकर आगामी पंचायत चुनावों की तैयारी करना है। उन्होंने महिला आरक्षण बिल का समर्थन करते हुए कहा कि इसे लागू करने से पहले जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होना अनिवार्य है।बैठक के दौरान संगठन में ‘एक व्यक्ति-एक पद’ के सिद्धांत को लागू करने पर भी गंभीर मंथन हुआ। प्रभारी ने स्पष्ट संकेत दिए कि जो नेता संगठन और सरकार दोनों में पदों पर आसीन हैं, उन्हें एक जिम्मेदारी छोड़नी होगी। सूत्रों के अनुसार, बैठक के बंद कमरे में कुछ नेताओं ने सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। विशेष रूप से मंडी और बिलासपुर जिलों से जुड़े नेताओं ने काम न होने पर अपनी नाराजगी जाहिर की। कुल मिलाकर, इस आम सभा के जरिए कांग्रेस ने जहां एक ओर पंचायत चुनावों के लिए बिगुल फूंका, वहीं दूसरी ओर आंतरिक असंतोष को शांत कर एकजुटता का संदेश देने का प्रयास किया है। वीरेंद्र/ईएमएस/17अप्रैल2026