बैरुत,(ईएमएस)। इजरायल और लेबनान के बीच शांति स्थापित करने के उद्देश्य से घोषित किया गया 10 दिवसीय युद्धविराम शुरू होते ही विवादों और हिंसा के घेरे में आ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहल पर हुए इस समझौते के प्रभावी होते ही बेरूत के दक्षिणी उपनगरों में भारी गोलीबारी और रॉकेट हमलों की आवाजों ने दुनिया को चौंका दिया। सीजफायर लागू होने के महज कुछ ही मिनटों के भीतर करीब आधे घंटे तक रॉकेट-प्रोपेल्ड ग्रेनेड दागे गए और आसमान लाल ट्रेसर बुलेट्स की रोशनी से भर गया, जिससे स्थानीय निवासियों में फिर से दहशत फैल गई। यह युद्धविराम इजरायल और ईरान समर्थित हिजबुल्लाह के बीच हफ्तों से चल रहे रक्तपात को रोकने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा था। हालांकि, जमीन पर हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। लेबनानी मीडिया के अनुसार, दक्षिणी लेबनान के कई हिस्सों में इजरायली गोलाबारी की खबरें मिली हैं, वहीं कई स्थानों पर मशीनगनों से फायरिंग जारी रही। इन घटनाओं ने इस 10 दिवसीय अस्थायी समझौते की स्थिरता और भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सीजफायर से ठीक पहले भी दोनों ओर से भीषण हमले हुए थे। उत्तरी इजरायल में हिजबुल्लाह के रॉकेट हमलों के जवाब में इजरायली सेना ने उनके कई लॉन्चर ठिकानों को तबाह कर दिया था। समझौता लागू होते ही विस्थापित हुए लोग भारी तादाद में अपने घरों की ओर लौटने लगे, जिससे सड़कों पर लंबा जाम लग गया। हालांकि, प्रशासन ने लोगों को अनफटे बमों के खतरे के प्रति आगाह किया है। इस बीच, ईरान का रुख और कड़ा हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने संकेत दिया था कि ईरान यूरेनियम संवर्धन रोकने को तैयार है, लेकिन तेहरान ने पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशों के बीच यह साफ कर दिया है कि वह बिना किसी ठोस फ्रेमवर्क और वादों को पूरा किए अमेरिका से कोई नई बातचीत नहीं करेगा। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि अमेरिका को अपनी अत्यधिक मांगों को वापस लेना होगा। मध्य पूर्व के मौजूदा हालात को देखते हुए यह स्पष्ट है कि सीजफायर की डोर बेहद कमजोर है और यह क्षेत्र अब भी किसी भी समय बड़े संघर्ष की चपेट में आ सकता है। वीरेंद्र/ईएमएस/17अप्रैल2026