- मप्र में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी शुरू होते ही सामने आने लगे फर्जीवाड़े... भोपाल (ईएमएस)। मप्र में इन दिनों समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी हो रही है। इसके साथ ही फर्जीवाड़े भी सामने आने लगे हैं। किसी खरीदी केंद्र पर खरीदी से अधिक गेहंू का स्टॉक मिला है, तो कहीं किसानों से अवैध वसूली की जा रही है। वहीं स्लॉट बुकिंग नहीं होने से किसान परेशान नजर आ रहे हैं। इस बीच समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी की प्रक्रिया को लेकर पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह ने गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि मप्र में पैसे लेकर खरीदी केंद्र बनाए गए हैं। जहां यूपी का गेहूं बिक रहा है। वहीं गेहूं तुलाई के नाम पर वेयरहाउस संचालक व सहकारी सोसायटी मनमानी कर रहे हैं। वेयरहाउस संचालक जल्दी से जल्दी गोडाउन भरने के लिए सीधे धर्मकांटे से तुलवाकर गेहूं डंप करवा रहे हैं, जबकि शासन के स्पष्ट नियम हैं कि स्लॉट बुकिंग के बगैर गेहूं नहीं तौलना है व गोदाम के भीतर गेहूं डंप नहीं करना है। फिर भी भोपाल के आसपास के कई गोडाउन में हजारों क्विंटल गेहूं का ढेर लग चुका है। प्रदेशभर से गेहूं खरीदी में किसानों के साथ ठगी के मामले सामने आ रहे हैं। इसमें भोपाल भी पीछे नहीं है। निहाल, निषिता, कांति व श्री वेयर हाउस में जाकर हालात देखे तो यहां हजारों क्विंटल गेहूं के ढेर मिले। मामले में अधिकारियों का कहना है कि चेक करवाकर नोटिस देंगे। दरअसल, जो ट्रॉली धर्मकांटे से सीधे तुलकर आ रही है, उसमें से प्रति क्विंटल 500 ग्राम कम की रसीद किसान को दी जाती है। यानी एक ट्रॉली में 50 क्विंटल गेहूं होता है, तो 25 किलो कम बताकर रसीद दी जाती है। ऐसे पूरे दिन में 50 ट्रॉली अनाज डंप हो रहा है। 12.50 क्विंटल गेहूं गायब कर दिया जाता है। सवाल उठ रहे हैं कि जब अनुमति नहीं है तो फिर किसका गेहूं गोडाउन में डंप हो रहा है? किसान की हर ट्रॉली से गायब होने वाला गेहूं कहां जाता है? सोसायटी का काम निगरानी करने का है तो फिर इतनी डंपिंग कैसे हो रही? नियमानुसार प्रत्येक किसान के गेहूं की बोरी की जियो टैगिंग होती है तो फिर एक साथ मिक्स करने पर कैसे पता चलेगा कि कौन सा गेहूं किस किसान का है? मौके पर सर्वेयर भी जांच करते नहीं मिले तो फिर गेहूं की गुणवत्ता जांचे बिना कैसे खरीदी हो रही है। - गोदामों में गेहूं के ढेर लगे गेहूं खरीदी में चल रहे फर्जीवाड़े का आकलन इसी से किया जा सकता है कि कई गोदामों में गेहूं के ढेर लगे हुए हैं। निषिता वेयरहाउस, तामोट के गोदाम में गेहूं के ढेर लगे थे। कुछ जगह हम्माल बैठकर बोरी भर रहे थे। ऑनर प्रदीप सिंह सेंगर ने का कहना है कि नियमानुसार तुलाई को रही है। श्री वेयरहाउस, खिल्ली खेड़ाके भीतर सिर्फ गेहूं के ढेर थे। एक-दो जगह हम्माल गेहूं बोरी में भर रहे थे। ऑनर श्रद्धा त्रिपाठी से जब पूछा कि सीधे धर्मकांटे से तुलवाकर क्या गेहूं एकत्रित कर सकते हैं, तो कहा- हां हम ऐसा कर सकते हैं।निहाल वेयर हाउस, औबेदुल्लागंज में धर्मकांटे पर गेहूं तुलवाकर खाली कराया जा रहा था। ऑनर पंकज कोठारी ने कहा- सब जगह ऐसा ही हो रहा है। कांति वेयरहाउस तामोट सोसायटी के अंतर्गत आने वाला यह वेयरहाउस श्याम सिंह चौहान का है। इसके पास खेत में हजारों क्विटंल गेहूं का ढेर लगा हुआ है। इस सोसायटी के प्रबंधक अनिल सेन से बात की तो बोले- किसान डाल गए। नागरिक आपूर्ति निगम के जिला प्रबंधक राजू कातुलकर का कहना है कि गेहूं इस तरह से डंप नहीं करवा सकते हैं। - किसानों के आरोप किसानों का आरोप है कि अफसरों को जांच कर ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई करना चाहिए। ताकि आम किसानों को राहत मिल सके। वैसे ही खरीदी में देरी हुई और ऊपर इस तरह से अतिरिक्त गेहूं की डिमांड से किसानों को नुकसान हो रहा है। किसानों का आरोप है कि एक क्विंटल पर एक किलो ज्यादा गेहूं की मांग की जा रही है। ट्रॉली पर 50 से 60 किलो ज्यादा गेहूं लिया जा रहा है। प्रति ट्रॉली 25 किलो कटौती का आरोप: बैरसिया के ग्राम भोजपुरा के किसान लक्ष्मीनारायण गुर्जर ने सिद्धी विनायक वेयरहाउस के खिलाफ सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने आरोप लगाया कि हर ट्रॉली पर 25 किलो गेहूं अतिरिक्त लिया जा रहा है। इस मामले की भी खाद्य विभाग के अधिकारी जांच कर रहे हैं। - विनोद/ 19 अप्रैल /2026