20-Apr-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। एक ठेकेदार को सिर्फ एक ईमेल भेजकर और प्रभावित ठेकेदार को अयोग्य ठहराए जाने का विरोध करने का कोई मौका दिए बिना, टेंडर प्रक्रिया से अयोग्य घोषित करने के दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के कदम को दिल्ली हाई कोर्ट ने रद दिया था। न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ ने कहा कि ईमेल के जरिए किसी ठेकेदार को इस तरह एकतरफा अयोग्य ठहराना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है। पीठ ने कहा कि अयोग्य ठहराए जाने के गंभीर परिणाम होते हैं और ऐसे मामलों में प्रक्रियागत निष्पक्षता जरूरी है। अदालत ने उक्त टिप्पणी व आदेश टेकराम इंटरप्राइजेज कंपनी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। इस कंपनी ने डीडीए के अलग-अलग परिसरों में स्थित स्पोर्ट्स सेंटरों के रखरखाव के कामों के लिए निकाले गए टेंडर में हिस्सा लेने के लिए आवेदन किया था। लेकिन, डीडीए 25 मार्च को एक ईमेल भेजकर टेकराम को बताया कि उसे टेंडर प्रक्रिया से अयोग्य घोषित कर दिया गया है। - अजीत झा/देवेन्द्र/नई दिल्ली/ ईएमएस/20/अप्रैल /2026