-1 लाख करोड़ की योजना से शहरों को ग्लोबल इंजन बनाने की तैयारी नई दिल्ली,(ईएमएस)। भारत में शहरी विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने अर्बन चैलेंज फंड (यूसीएफ) की शुरुआत की है। करीब 1 लाख करोड़ रुपये के इस महत्वाकांक्षी फंड का लक्ष्य देश के शहरों को वैश्विक स्तर के आर्थिक इंजन में बदलना है। हालांकि, इस योजना की असली परीक्षा राज्यों और शहरी निकायों (यूएलबीएस) के हाथों में होगी, क्योंकि इसके क्रियान्वयन और निवेश जुटाने की जिम्मेदारी उन्हीं पर है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, यूसीएफ की अवधि 2025-26 से 2030-31 तक निर्धारित की गई है। इस दौरान लगभग 4 लाख करोड़ रुपये के कुल निवेश को आकर्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। यह योजना केवल सरकारी फंडिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य शहरों को आत्मनिर्भर, निवेश योग्य और प्रतिस्पर्धी बनाना है। योजना को तीन चरणों में लागू किया जाएगा। पहले चरण (2025-27) में बुनियादी ढांचे की तैयारी पर ध्यान दिया जाएगा। इस दौरान राज्य सरकारें परियोजनाओं की पहचान करेंगी और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करेंगी। इससे शहरों की क्रेडिट रेटिंग और वित्तीय मजबूती बढ़ाने में मदद मिलेगी। दूसरा चरण 2027 से 2029 तक चलेगा, जिसमें बड़े पैमाने पर निवेश और परियोजनाओं का क्रियान्वयन होगा। इस चरण में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी), बॉन्ड और बैंक लोन के जरिए फंड जुटाने पर जोर दिया जाएगा। शहरी परिवहन, जल आपूर्ति, स्वच्छता, पुराने शहरों का पुनर्विकास और जलवायु-लचीले (क्लाइमेट-रेजिलिएंट) इंफ्रास्ट्रक्चर इस चरण के प्रमुख फोकस क्षेत्र होंगे। तीसरा और अंतिम चरण 2029 से 2031 तक चलेगा, जिसमें इन परियोजनाओं के परिणाम सामने आएंगे और सफल मॉडलों का विस्तार अन्य शहरों में किया जाएगा। इस चरण का उद्देश्य शहरों को मजबूत आर्थिक ग्रोथ हब के रूप में विकसित करना है। योजना की एक अहम शर्त यह है कि केंद्र सरकार कुल फंड का केवल 25प्रतिशत ही देगी, जबकि 50प्रतिशत से अधिक निवेश बाजार से जुटाना होगा। इसमें बॉन्ड, बैंकिंग सिस्टम और पीपीपी मॉडल की बड़ी भूमिका होगी। सभी राज्यों ने इस योजना के तहत समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर कर अपनी प्रतिबद्धता जताई है। विशेष रूप से टियर-2 और टियर-3 शहरों को क्रेडिट गारंटी के माध्यम से वित्तीय बाजार से जोड़ने की कोशिश की जाएगी, जबकि पहाड़ी और पूर्वोत्तर राज्यों को अतिरिक्त लाभ दिया जाएगा। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह योजना पारंपरिक सरकारी फंडिंग मॉडल से हटकर बाजार आधारित विकास की ओर एक बड़ा बदलाव है, जो आने वाले वर्षों में भारत के शहरी ढांचे को पूरी तरह बदल सकता है। हिदायत/ईएमएस 21 अप्रैल 2026