तेहरान,(ईएमएस)। ईरान और अमेरिका के बीच अभी युद्धविराम है और इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच वार्ता की तैयारी चल रही है। इस बीच ईरान जंग में चीन की कथित भूमिका ने अमेरिका की चिंता बढ़ा दी है। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की पूर्व राजदूत निक्की हेली के दावों और हालिया घटनाक्रम ने इस बात के संकेत दिए हैं कि ईरान-अमेरिका टकराव में चीन की डायरेक्ट एंट्री की आशंका गहरा रही है, जिससे डोनाल्ड ट्रंप भी सतर्क हो गए हैं। शायद यही वजह है कि ईरान की तरफ से वार्ता से साफ इनकार करने के बावजूद वह उपराष्ट्रपति वेंस को पाकिस्तान भेज रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की पूर्व राजदूत निक्की हेली ने दावा किया है कि हाल ही में अमेरिकी सेना ने होर्मूज में जिस ईरानी जहाज को जब्त किया है, वह चीन से ईरान की ओर जा रहा था। हेली के मुताबिक इस जहाज में ऐसे रासायनिक पदार्थ मिलने के संकेत मिले हैं, जिनका इस्तेमाल मिसाइल निर्माण में किया जा सकता है। हेली ने कहा कि चीन, ईरान के शासन को मजबूत करने में मदद कर रहा है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज नाकेबंदी को लेकर तनाव चरम पर है। हेली ने चेतावनी देते हुए कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए अमेरिका को विशेष बल की तैनाती करनी पड़ सकती है। उन्होंने कहा कि यह एक बेहद जोखिम भरा मिशन होगा, जिसे पूरा करने में एक सप्ताह से दस दिन तक का समय लग सकता है, लेकिन यह जरूरी है ताकि ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर किया जा सके। उधर चीन ने इस जहाज को ‘जबरन रोकने’ पर चिंता जताई है और संबंधित पक्षों से जिम्मेदारी से संघर्ष-विराम समझौते का पालन करने का आग्रह किया है। चीनी विदेश मंत्री ने एक नियमित प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि होर्मुज़ में स्थिति संवेदनशील और जटिल है। इसमें शामिल पक्षों को तनाव को और बढ़ने से रोकना चाहिए और होर्मूज से सामान्य आवाजाही फिर से शुरू करने के लिए जरूरी हालात बनाने चाहिए। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन को लेकर अलग रुख दिखाया है। ट्रंप ने बीते बुधवार दावा किया था कि चीन ने ईरान को हथियार न देने पर सहमति जताई है। उन्होंने यह भी कहा था कि वह होर्मुज को स्थायी रूप से खोलने की दिशा में काम कर रहे हैं, जिससे वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति सुचारु रह सके। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा कि चीन इस कदम से खुश है और यह पूरी दुनिया के हित में है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि उनकी जल्द ही चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात होने वाली है, जिसमें दोनों देशों के बीच सहयोग को और मजबूत किया जाएगा। ऐसे में निक्की हेली के दावे और अमेरिकी कार्रवाई ने इस आशंका को और मजबूत कर दिया है कि ईरान संकट अब सिर्फ दो देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें बड़ी शक्तियों की सीधी भागीदारी देखने को मिल सकती है। यही वजह है कि ट्रंप प्रशासन भी अब हर कदम फूंक-फूंक कर रख रहा है और चीन की भूमिका पर करीबी नजर बनाए हुए है। सिराज/ईएमएस 21अप्रैल26