21-Apr-2026
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-याचिकाकर्ता की मंशा पर जताई शंका, सार्वजनिक धन के दुरुपयोग के आरोप नहीं माने नागपुर,(ईएमएस)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत को मिली जेड प्लस सुरक्षा पर होने वाले खर्च को लेकर दायर जनहित याचिका को बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने खारिज कर दिया है। अदालत ने न केवल याचिका को अस्वीकार किया, बल्कि याचिकाकर्ता की मंशा पर भी सवाल उठाए। यह मामला हाईकोर्ट की नागपुर पीठ के समक्ष आया था, जहां मुख्य न्यायाधीश जस्टिस श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति जस्टिस अनिल किलोर की पीठ ने सुनवाई की। याचिका में दावा किया गया था कि भागवत को दी गई जेड प्लस सुरक्षा पर हर महीने लगभग 40 से 45 लाख रुपये खर्च हो रहे हैं, जो करदाताओं के पैसे का दुरुपयोग है। नागपुर निवासी ललन सिंह द्वारा दायर इस याचिका में कहा गया था कि चूंकि आरएसएस एक पंजीकृत संगठन नहीं है, इसलिए उसके प्रमुख को दी जा रही सुरक्षा का खर्च सरकार की बजाय संगठन को वहन करना चाहिए। याचिकाकर्ता ने अदालत से अनुरोध किया था कि इस खर्च की भरपाई संघ से कराई जाए। याचिका में मुकेश अंबानी से जुड़े एक मामले का भी हवाला दिया गया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने 2023 में निर्देश दिया था कि उन्हें दी गई जेड प्लस सुरक्षा का खर्च उनके परिवार द्वारा उठाया जाए। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और याचिका को खारिज करते हुए याचिकाकर्ता के इरादों पर सवाल उठाए। अदालत ने संकेत दिया कि इस तरह की याचिकाएं जनहित के नाम पर दाखिल की जाती हैं, लेकिन उनके पीछे वास्तविक उद्देश्य संदिग्ध हो सकता है। गौरतलब है कि मोहन भागवत की सुरक्षा को जून 2015 में बढ़ाकर जेड प्लस श्रेणी में किया गया था, जिसके बाद उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी सीआईएसएफ को सौंप दी गई थी। इससे पहले उनकी सुरक्षा महाराष्ट्र पुलिस के पास थी। उल्लेखनीय है कि उन्हें पहली बार 2012 में तत्कालीन यूपीए सरकार के दौरान जेड प्लस सुरक्षा प्रदान की गई थी, जब सुशील कुमार शिंडे देश के गृहमंत्री थे। हिदायत/ईएमएस 21अप्रैल26