नई दिल्ली (ईएमएस)। गर्मी के साथ ही आम ने बाजारों में दस्तक दे दी है। वर्तमान में कोंकण का राजा हापुस आम अपनी आसमान छूती कीमतों और घटती प्रामाणिकता को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है। बीते दिनों महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र में आम की फसल पर आई भीषण प्राकृतिक आपदा का परिणाम है, जिसने लाखों किसानों की आजीविका को संकट में डाल दिया है। सिंधुदुर्ग जिले के पालक मंत्री नितेश नारायण राणे ने स्वयं बागानों का दौरा कर इसे पिछले 50 सालों की सबसे बड़ी बर्बादी बताया। उन्होंने कहा कि जहाँ अमूमन 600 पेटियां निकलती थीं, वहाँ इस बार मुश्किल से 50 पेटियां ही मिल पा रही हैं, जिसका अर्थ है उत्पादन में 80 से 85 प्रतिशत तक की भारी गिरावट। रत्नागिरी कोंकण हापुस आंबा उत्पादक और विक्रेता सहकारी संस्था के अध्यक्ष डॉ. विवेक भिड़े ने भी इसे पिछले दो दशकों का सबसे कम उत्पादन करार दिया। मुंबई की वाशी एपीएमसी मंडी में भी आम की आवक 2,000-3,000 पेटियों से घटकर केवल 150-200 पेटियों तक सिमट गई है। बालासाहेब सावंत कोंकण कृषि विद्यापीठ और राज्य कृषि विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, इस तबाही का कारण दिसंबर में असामान्य ठंड, उसके बाद बेमौसम बारिश और लगातार नमी से फूलों पर फंगस-कीटों का हमला, तथा फरवरी में अचानक बढ़े तापमान से फलों का समय से पहले गिरना है। प्रकृति के इन क्रमिक वारों ने बागानों को लगभग खाली कर दिया। असली हापुस की इस कमी ने नकली आम के बाज़ार को भी पनपने का अवसर दे दिया है। मुंबई के क्रॉफर्ड मार्केट जैसे प्रमुख स्थानों पर कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु से आने वाले आमों को हापुस के नाम पर बेचा जा रहा है। एपीएमसी के पूर्व फल बाज़ार निदेशक संजय पांसरे का अनुमान है कि मुंबई में बिकने वाले 60 प्रतिशत से अधिक हापुस वास्तव में दक्षिण भारतीय किस्में हैं। असली कोंकण हापुस की पहचान उसकी तीव्र खुशबू, गहरा केसरिया-पीला रंग और पतला, मुलायम छिलका है, जो इसे दूसरों से अलग करता है। बाज़ार में ऊँचे दाम होने के बावजूद, किसानों को इसका कोई लाभ नहीं मिल रहा, क्योंकि उनके पास बेचने के लिए पर्याप्त फसल ही नहीं है। खाद, दवाइयों और पानी पर किया गया उनका सारा निवेश व्यर्थ चला गया। किसान नेता और पूर्व सांसद राजू शेट्टी ने सरकार से प्रति हेक्टेयर रुपए 5 लाख का मुआवजा, बिजली बिलों में छूट और सहकारी क़र्ज़ माफी की मांग की है। उन्होंने जीआई टैग के कड़ाई से पालन पर भी जोर दिया, ताकि कोंकण की विशिष्ट पहचान बनी रहे। सुदामा/ईएमएस 22 अप्रैल 2026